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लंदन में भारतीय नाम की आड़ में रेस्टोरेंट क्यों चलाते हैं पाकिस्तानी, क्यों छिपाते हैं पहचान?

निधि पाल   |  26 Mar 2026 08:41 AM (IST)
लंदन में भारतीय नाम की आड़ में रेस्टोरेंट क्यों चलाते हैं पाकिस्तानी, क्यों छिपाते हैं पहचान?

लंदन की गलियों में घूमते हुए जब आप किसी इंडियन रेस्टोरेंट की खुशबू की ओर खिंचे चले जाते हैं, तो मुमकिन है कि उस किचन का मालिक कोई भारतीय न होकर पाकिस्तानी या बांग्लादेशी हो. विदेश की धरती पर भारतीय खाने का रुतबा ऐसा है कि पड़ोसी मुल्कों के व्यापारी भी अपनी असली पहचान छिपाकर इंडियन ब्रांड का सहारा लेते हैं. आखिर इसके पीछे क्या मजबूरी है और क्या यह सिर्फ बिजनेस की कोई चाल है या पहचान का संकट? आइए इसे गहराई से समझते हैं.

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लंदन में भारतीय खाने की लोकप्रियता किसी परिचय की मोहताज नहीं है. इंडियन फूड दुनिया भर में एक स्थापित और भरोसेमंद ब्रांड बन चुका है. लोग इस नाम को सुनते ही एक खास स्वाद और गुणवत्ता की उम्मीद करते हैं.

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पाकिस्तानी और बांग्लादेशी रेस्टोरेंट मालिक अच्छी तरह जानते हैं कि अगर वे अपने आउटलेट का नाम 'पाकिस्तानी रेस्टोरेंट' रखेंगे, तो शायद उन्हें वह शुरुआती बढ़त न मिले जो इंडियन नाम से मिलती है. ग्राहकों के बीच भारतीय भोजन की जो साख है, उसका सीधा आर्थिक लाभ उठाने के लिए ही वे इस नाम की आड़ लेते हैं.

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पहचान छिपाने के पीछे एक बड़ा कारण सामाजिक और व्यावसायिक स्वीकृति भी है. कई जानकारों का मानना है कि विदेशों में इंडियन कहलाना ज्यादा आसान और फायदेमंद रहता है. पश्चिमी देशों में भारतीय संस्कृति और खान-पान को लेकर एक सकारात्मक नजरिया है.

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ऐसे में अपनी पहचान को भारतीय नाम के पीछे छिपाकर ये लोग उस नफरत या संशय से बच जाते हैं, जो कई बार अन्य दक्षिण एशियाई देशों के नागरिकों को झेलनी पड़ सकती है. उनके लिए खुद को इंडियन बताना बिजनेस में टिके रहने का एक सुरक्षित तरीका है.

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एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि दक्षिण एशियाई देशों के खान-पान में काफी समानताएं हैं. करी, बिरयानी, कोरमा और नान जैसी डिशेज भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश तीनों ही जगहों पर मशहूर हैं. चूंकि विदेशों में रहने वाले स्थानीय नागरिक या अंग्रेज इन तीनों देशों के मसालों और खाना पकाने के बारीक अंतर को नहीं समझते, इसलिए उनके लिए यह सब इंडियन फूड ही है.

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रेस्टोरेंट मालिकों को लगता है कि जब खाना लगभग एक जैसा ही है, तो क्यों न उस नाम का इस्तेमाल किया जाए जो पहले से ही बाजार में सुपरहिट है. यह पूरी तरह से एक सोची-समझी बिजनेस स्ट्रैटेजी है. इंडियन रेस्टोरेंट नाम सुनते ही ग्राहकों के मन में एक भरोसा जागता है. विज्ञापन और मार्केटिंग के लिहाज से भी 'इंडियन करी हाउस' या 'इंडियन स्पाइस' जैसे नाम लोगों को अपनी ओर जल्दी खींचते हैं.

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लंदन जैसे महंगे शहर में जहां रेस्टोरेंट चलाना बेहद खर्चीला काम है, वहां मालिक किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते. वे उस नाम के साथ जाना पसंद करते हैं जिसकी मार्केट वैल्यू पहले से ही आसमान छू रही है.

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