Sea Water: समुद्र का पानी खारा ही क्यों होता है, मीठा क्यों नहीं? जान लीजिए जवाब
बारिश का पानी थोड़ा एसिडिक होता है क्योंकि यह एटमॉस्फियर से कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है. जब यह हल्की एसिडिक बारिश जमीन पर गिरती है तो यह इरोजन नाम की प्रक्रिया से चट्टानों को धीरे-धीरे तोड़ती है. इस टूटने के दौरान चट्टानों से सोडियम और क्लोराइड जैसे मिनरल आयन निकलते हैं. यह घुले हुई मिनरल्स नदियों और झरनों द्वारा समुद्र की तरफ ले जाए जाते हैं.
नदियां पहाड़ों और मिट्टी से घुले हुए नमक और मिनरल को लगातार समुद्र में ले जाती हैं. हर साल मिलने वाली मात्रा कम होती है लेकिन यह प्रक्रिया अरबों सालों से हो रही है. वक्त के साथ इन मिनरल्स के लगातार आने से समुद्र में नमक की मात्रा काफी बढ़ गई है.
सूरज की गर्मी से समुद्र का पानी इवैपोरेट हो जाता है. इससे बादल बनते हैं जो बाद में बारिश करते हैं. हालांकि जब पानी इवैपोरेट होता है तो घुले हुए नमक पीछे रह जाते हैं. क्योंकि यह साइकिल बार-बार दोहराई जाती है इस वजह से नमक से ज्यादा पानी समुद्र से निकल जाता है.
समुद्र की सतह के नीचे हाइड्रोथर्मल वेंट और पानी के नीचे के ज्वालामुखी सीधे समुद्री पानी में और मिनरल्स और नमक छोड़ते हैं. यह जियोलॉजिकल प्रक्रिया समुद्र के केमिकल बनावट में योगदान करती है. इससे कुल खारापन बढ़ता है.
नदियों में भी घुले हुए नमक होते हैं. लेकिन उनका पानी लगातार बहता रहता है. आखिर में जाकर यह समुद्र में मिल जाता है. क्योंकि नदिया लंबे समय तक पानी को रोक कर नहीं रखती इस वजह से नमक ज्यादा कंसंट्रेशन में जमा नहीं होते हैं. दूसरी तरफ समुद्र इन मिनरल्स के लिए आखिरी कलेक्शन प्वाइंट का काम करते हैं. इस वजह से समय के साथ नमक का लेवल बढ़ता है.
औसतन समुद्र के पानी में लगभग 3.5% खारापन होता है. इसका मतलब है कि हर किलोग्राम समुद्री पानी में लगभग 35 ग्राम नमक घुला हुआ होता है.