✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो

Heat Index In India: गर्मी में टेंपरेचर से ज्यादा क्यों लगती है गर्मी, जान लीजिए साइंस

निधि पाल   |  26 Apr 2026 01:57 PM (IST)
Heat Index In India: गर्मी में टेंपरेचर से ज्यादा क्यों लगती है गर्मी, जान लीजिए साइंस

Heat Index In India: इस साल गर्मी ने अपने तेवर शुरुआत से ही कड़े कर लिए हैं. अप्रैल के महीने में ही उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में पारा 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है. आम तौर पर इस तापमान को सहन करने की एक सीमा होती है, लेकिन इन दिनों स्थिति ऐसी है कि 40 डिग्री का तापमान भी शरीर को 45-46 डिग्री जैसी तपन का एहसास करा रहा है. यह महज एक भ्रम नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण छिपा है. हम विकास की अंधी दौड़ में कंक्रीट के जंगलों में घिरते जा रहे हैं, जिसका सीधा असर हमारे आसपास के वातावरण और हमारी सहनशक्ति पर पड़ रहा है.

1

जब हम गर्मी महसूस करते हैं, तो वह केवल हवा का तापमान नहीं होता, बल्कि हीट इंडेक्स का कमाल होता है. यह तापमान और हवा में मौजूद नमी का एक मिला-जुला प्रभाव है. विज्ञान के अनुसार, हमारा शरीर पसीने के माध्यम से खुद को ठंडा रखता है.

Continues below advertisement
2

जब हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी ज्यादा होती है, तो त्वचा का पसीना सूख नहीं पाता. पसीना सूखने की यह धीमी प्रक्रिया शरीर को राहत नहीं दे पाती, जिससे हमें वास्तविक तापमान से कहीं अधिक गर्मी महसूस होती है.

Continues below advertisement
3

बारिश के मौसम या समुद्र तटीय इलाकों में अक्सर लोग इसी कारण से दमघोंटू गर्मी का अनुभव करते हैं. आजकल शहरों में ऊंची इमारतें, डामर की सड़कें और कंक्रीट के ढांचे सूरज की गर्मी को सोखने का काम करते हैं. इन सतहों में गर्मी को जज्ब करने और उसे लंबे समय तक छोड़ने की क्षमता होती है, जिसे अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट कहा जाता है.

4

शहर रात भर इस गर्मी को छोड़ते रहते हैं, जिससे रातें भी उमस भरी हो जाती हैं. इसके विपरीत, गांवों में हरियाली और खुली जगह होने के कारण तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है. इसके साथ ही, शहरों में ऊंची इमारतें हवा के प्राकृतिक बहाव को रोक देती हैं, जिससे पसीने को सुखाने वाली ठंडी हवा हम तक पहुंच ही नहीं पाती है.

5

पिछले कुछ दशकों में जलवायु परिवर्तन के कारण पूरी पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ा है. हीट वेव यानी लू की अवधि अब पहले से कहीं अधिक लंबी हो गई है, जिससे शरीर को खुद को सामान्य तापमान पर लाने का मौका ही नहीं मिलता है. हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के महीन कण गर्मी को वातावरण में ही फंसा लेते हैं.

6

इसके अलावा, शहरों में चलने वाली मशीनों, एयर कंडीशनर और वाहनों से निकलने वाली कृत्रिम गर्मी भी हमारे आस-पास के वातावरण को और अधिक गर्म बना देती है. दोपहर के समय सूरज की सीधी यूवी किरणें हमारे शरीर को झुलसाने के लिए काफी होती हैं, जो महसूस होने वाली गर्मी में इजाफा करती हैं.

7

हर व्यक्ति की गर्मी सहने की क्षमता भिन्न होती है, लेकिन शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन इस क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करती है. जब शरीर में पानी कम होता है, तो उसका आंतरिक तापमान नियंत्रण तंत्र फेल होने लगता है, जिससे चक्कर आना और थकान होना स्वाभाविक है.

8

हमारे कपड़ों का चुनाव भी इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. गहरे रंग के कपड़े गर्मी को सोखते हैं, जबकि तंग कपड़े हवा के प्रवाह को रोकते हैं. हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े न केवल पसीने को सोखने में मदद करते हैं, बल्कि हवा को त्वचा तक पहुंचने का मौका भी देते हैं, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • जनरल नॉलेज
  • Heat Index In India: गर्मी में टेंपरेचर से ज्यादा क्यों लगती है गर्मी, जान लीजिए साइंस
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.