जरा-से बुखार में क्यों कांपने लगता है पूरा शरीर, कैसे हिल जाता है सिस्टम?

मौसम में आ रहे बदलाव और बढ़ती नमी के बीच इन दिनों वायरल फीवर, फ्लू (H1N1) और डेंगू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. अक्सर ऐसा होता है कि हल्का सा बुखार आते ही इंसान का शरीर बुरी तरह कांपने लगता है और अंदरूनी महसूस होता है कि पूरा सिस्टम हिल गया है. हालांकि, यह किसी बड़ी अनहोनी का संकेत नहीं है, बल्कि हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम की एक सोची-समझी प्रतिक्रिया है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर बुखार के दौरान हमारे शरीर के भीतर क्या-क्या बदलाव होते हैं.
हमारे दिमाग के भीतर 'हाइपोथैलेमस' नाम का एक बेहद खास हिस्सा मौजूद होता है, जो शरीर के तापमान को संतुलित रखने का काम करता है. इसे हम शरीर का कुदरती थर्मोस्टेट भी कह सकते हैं. जब भी कोई खतरनाक वायरस या बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश करता है, तो उससे मुकाबला करने के लिए हमारा इम्यून सिस्टम 'पायरोजीन' नामक रसायन रिलीज करता है.
यह रसायन सीधे दिमाग तक संदेश पहुंचाता है कि कीटाणुओं का सफाया करने के लिए शरीर के अंदर का तापमान तुरंत बढ़ाना जरूरी है. संदेश मिलते ही हाइपोथैलेमस शरीर के मानक तापमान को बढ़ा देता है.
उदाहरण के तौर पर, यह शरीर के तापमान को सामान्य 98.6 डिग्री फारेनहाइट से बढ़ाकर 102 डिग्री फारेनहाइट पर सेट कर देता है, लेकिन उस वक्त आपके शरीर का असल तापमान तो पुराना यानी 98.6 डिग्री ही होता है.
दिमाग द्वारा तय किए गए नए तापमान और शरीर के मौजूदा तापमान के बीच इसी अंतर की वजह से दिमाग को लगता है कि शरीर बहुत ठंडा पड़ गया है और आपको अचानक कंपकंपी छूटने लगती है.
दिमाग को जब यह लगता है कि शरीर का तापमान कम है, तो वह मांसपेशियों को तेजी से काम करने का आदेश देता है. इसके बाद मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ने और फैलने लगती हैं. मांसपेशियों की इसी झटकेदार हलचल को हम कंपकंपी या कांपना कहते हैं.
इस पूरी प्रक्रिया के पीछे की मुख्य वजह मांसपेशियों की मेहनत से शरीर में गर्मी पैदा करना होता है, ताकि शरीर का तापमान दिमाग द्वारा तय किए गए ऊंचे स्तर तक जल्द से जल्द पहुंच सके.
जब शरीर संक्रमण से लड़ाई लड़ रहा होता है, तो बाहरी त्वचा तक खून पहुंचाने वाली नसें सिकुड़ जाती हैं. ऐसा इसलिए होता है ताकि शरीर की अंदरूनी गर्मी त्वचा के रास्ते बाहर न निकल पाए. यही कारण है कि बुखार आने पर मरीज के हाथ-पैर अक्सर बहुत ठंडे महसूस होते हैं.
इसके साथ ही, शरीर अपनी पूरी ताकत और ऊर्जा तापमान बढ़ाने में लगा देता है, जिससे मरीज को बहुत ज्यादा सुस्ती, कमजोरी और पूरे बदन में तेज दर्द का अहसास होने लगता है.