Antarctica Government: अंटार्कटिका में नहीं है कोई परमानेंट नागरिक, जानें वहां किसकी चलती है सरकार
अंटार्कटिका को अंटार्कटिक ट्रीटी के तहत मैनेज किया जाता है. इस ट्रीटी पर 1959 में साइन किए गए थे और अब इसमें 50 से ज्यादा देश शामिल हैं. यह ट्रीटी इस बात को पक्का करती है कि कॉन्टिनेंट का इस्तेमाल सिर्फ शांतिपूर्ण कामों और साइंटिफिक रिसर्च के लिए किया जाएगा.
अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, चिली, फ्रांस, न्यू जीलैंड, नॉर्वे और यूनाइटेड किंगडम ने पहले अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों पर दावा किया है. हालांकि अंटार्कटिक ट्रीटी ने इन दावों को रोक दिया. इसका मतलब है कि कोई भी देश मलिकाना हक नहीं बढ़ा सकता या फिर लागू नहीं कर सकता.
अंटार्कटिक ट्रीटी कॉन्टिनेंट पर सभी मिलिट्री ऑपरेशन, हथियारों की टेस्टिंग और न्यूक्लियर वेस्ट डिस्पोजल पर बैन लगाती है. अंटार्कटिका को शांति और साइंस का जोन बनाया गया है.
अंटार्कटिका में टेंपरेरी आबादी है. इसमें ज्यादातर साइंटिस्ट और रिसर्च स्टेशन पर काम करने वाले सपोर्ट स्टाफ हैं. गर्मियों में रिसर्च सीजन के दौरान लगभग 5000 लोग वहां रहते हैं और सर्दियों में लगभग 1000 लोग. ये लोग परमानेंट नागरिक नहीं है और आखिर में अपने देश लौट जाते हैं.
अंटार्कटिका में धरती का सबसे खराब मौसम है. यहां तापमान -90 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है. यहां पर हवाएं 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं और बर्फीले तूफान काफी ज्यादा आम हैं.
अंटार्कटिका का लगभग 97% हिस्सा बर्फ से ढका है. इस वजह से यहां खेती या फिर कुदरती खाना बनाने की कोई मिट्टी नहीं है. इसके अलावा इस कॉन्टिनेंट में 6 महीने लगातार दिन होता है और 6 महीने रात.