Science Behind Tears: रोते समय क्यों निकलते हैं आंखों से आंसू, क्या है इसके पीछे का साइंस?

Science Behind Tears: रोना एक साधारण इमोशनल रिएक्शन लग सकता है लेकिन हर आंसू के पीछे बायोलॉजी, केमिस्ट्री और दिमाग की एक्टिविटी का एक बड़ा ही अजीब मिश्रण होता है. चाहे दुख, काफी ज्यादा खुशी या प्याज काटने से अचानक जलन की वजह से आपकी आंखों से आंसू बहें, यह पूरी प्रक्रिया शरीर के अंदर एक काफी व्यवस्थित सिस्टम के जरिए कंट्रोल होती है. आइए जानते हैं कि रोते समय आंखों से आंसू क्यों निकालते हैं और इसके पीछे क्या साइंस है.
सभी आंसू एक जैसे नहीं होते. इंसान का शरीर आंखों को नम रखने के लिए बेसल आंसू, धूल या धुएं जैसी जलन पैदा करने वाली चीजों से आंखों की रक्षा के लिए रिफ्लेक्स आंसू और दुख, खुशी, गुस्सा या राहत जैसी भावनाओं के दौरान बहने वाले इमोशनल आंसू पैदा करता है.
जब तेज भावनाएं होती हैं तो दिमाग का लिम्बिक सिस्टम खासकर हाइपोथैलेमस एक्टिव हो जाता है. यह इमोशनल सेंटर लैक्रिमल ग्लैंड्स को सिग्नल भेजता है और इससे आंसू बनने लगते हैं.
वैज्ञानिक अध्ययनों से यह पता चलता है कि इमोशनल आंसुओं में स्ट्रेस से जुड़े केमिकल और हार्मोन होते हैं. इसमें ल्यूसीन एन्केफेलिन जो कि एक प्राकृतिक दर्द निवारक होता है शामिल है. आंसुओं के जरिए इन पदार्थों को निकाल कर शरीर इमोशनल तनाव को कम कर सकता है. यही वजह होती है कि लोग अक्सर रोने के बाद हल्का या फिर शांत महसूस करते हैं.
जब भी कोई हानिकारक चीज आंख में जाती है जैसे कि प्याज की भाप, धुआं या फिर केमिकल तो सेंसरी नसें दिमाग को तेजी से चेतावनी भेजती हैं. इसी के जवाब में रिफ्लेक्स आंसू जलन पैदा करने वाली चीज को धोने के लिए आंख में भर जाते हैं.
जब आप रो नहीं रहे होते तब भी आपकी आंखें लगातार बेसल आंसुओं से ढकी रहती है. इन आंसुओं में पानी, तेल और एंटीबैक्टीरियल एंजाइम होते हैं. यह सूखापन को रोकते हैं, इंफेक्शन के खतरे को कम करते हैं और साथ ही साफ नजर बनाए रखते हैं.
आंसू हर आंख के सॉकेट के ऊपरी बाहरी हिस्से में मौजूद लैक्रिमल ग्लैंड्स द्वारा बनाए जाते हैं. जब यह ग्लैंड्स इमोशन या इरिटेशन की वजह से ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं तो ज्यादा फ्लूइड पलकों से बाहर निकल जाता है.