✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा

एक जैसे क्यों नहीं होता भारतीय ट्रेनों का रंग? हर कोच के कलर की अलग है कहानी

निधि पाल   |  11 Feb 2026 09:57 AM (IST)
1

भारत में रेलवे सिर्फ सफर का साधन नहीं, बल्कि एक पूरा सिस्टम है. यहां कोच के रंग यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों दोनों के लिए संकेत का काम करते हैं. किस कोच में एसी है, कौन सा स्लीपर है, कौन सा खास काम के लिए बना है, यह सब रंग देखकर काफी हद तक समझ आ जाता है.

Continues below advertisement
2

यही वजह है कि भारतीय ट्रेनों के रंग एक जैसे नहीं रखे जाते है. भारतीय रेलवे में नीला रंग सबसे आम है. यह रंग ज्यादातर स्लीपर और जनरल कोच में इस्तेमाल होता है. नीला रंग नॉन-एसी और आम यात्रियों की पहचान बन चुका है.

Continues below advertisement
3

पहले यही कोच मरून रंग में होते थे, लेकिन समय के साथ रेलवे ने नीले रंग को अपनाया क्योंकि यह धूप और धूल में ज्यादा टिकाऊ माना गया है. भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म पर भी नीले कोच जल्दी पहचाने जाते हैं. मरून रंग भारतीय रेल का इतिहास समेटे हुए है. पुराने जमाने में लगभग सभी ट्रेनें इसी रंग की होती थीं.

4

आज भी कुछ हेरिटेज ट्रेनें या पुराने कोच मरून रंग में दिख जाते हैं. यह रंग रेलवे के शुरुआती दौर और पुरानी तकनीक की याद दिलाता है. हालांकि अब नए कोचों में इसका इस्तेमाल बहुत कम हो गया है.

5

हरा रंग आमतौर पर गरीब रथ ट्रेनों से जुड़ा है. गरीब रथ ट्रेनें कम किराए में एसी सुविधा देने के लिए शुरू की गई थीं. हरा रंग यहां किफायती और सरल यात्रा का संकेत देता है. दूर से ही यात्री समझ जाते हैं कि यह बजट एसी ट्रेन है. इससे यात्रियों को सही ट्रेन पहचानने में आसानी होती है.

6

लाल या जंग जैसा रंग आमतौर पर एसी कोच, चेयर कार और प्रीमियम ट्रेनों में देखा जाता है. यह रंग आराम, सुविधा और थोड़ी प्रीमियम सेवा का संकेत देता है. रेलवे चाहता है कि यात्री प्लेटफॉर्म पर जल्दी समझ सकें कि एसी कोच कहां हैं, इसलिए यह रंग चुना गया.

7

कुछ कोचों पर पीली धारियां या खास निशान बने होते हैं. ये ब्रेक वैन, पार्सल वैन या तकनीकी काम वाले कोच होते हैं. पीला रंग कम रोशनी और रात में भी साफ दिखता है, जिससे सुरक्षा बनी रहती है. रेलवे के लिए यह सेफ्टी से जुड़ा अहम संकेत है.

8

नई वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों में सफेद, ग्रे, ऑरेंज रंग का इस्तेमाल हो रहा है. ये रंग आधुनिक तकनीक, तेज रफ्तार और नई सोच का प्रतीक है. इससे ट्रेन की पहचान दूर से ही हो जाती है कि यह पारंपरिक नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की ट्रेन है.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • जनरल नॉलेज
  • एक जैसे क्यों नहीं होता भारतीय ट्रेनों का रंग? हर कोच के कलर की अलग है कहानी
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.