स्पेस में जाने से पहले अंतरिक्ष यात्री पानी के नीचे क्यों करते हैं ट्रेनिंग, जानें क्या है वजह?

Astronaut Training: अंतरिक्ष में जाने से पहले अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के बाहर के भारहीन वातावरण के लिए खुद को तैयार करने के लिए पानी के अंदर कड़ी ट्रेनिंग लेते हैं. नासा जैसी अंतरिक्ष एजेंसियां न्यूट्रल बायेंसी लैबोरेट्री नाम के एक बड़े स्विमिंग पूल का इस्तेमाल करती हैं. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
पानी के अंदर की ट्रेनिंग न्यूट्रल बायेंसी की स्थिति बनाती है. इसमें अंतरिक्ष यात्री ना तो डूबते हैं और ना ही सतह की तरफ तैरते हैं. यह अंतरिक्ष में महसूस होने वाली भारहीनता की स्थिति से काफी समान है.
अंतरिक्ष यात्रा स्पेस वॉक करने की प्रैक्टिस करते हैं. इसे एक्स्ट्रावेहीकुलर एक्टिविटी भी कहा जाता है. वे भारी स्पेससूट पहनकर उपकरणों को संभालना, मरम्मत करना और अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर काम करना सीखाते हैं.
न्यूट्रल बायेंसी लेबोरेटरी में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन और दूसरे अंतरिक्ष यानों के असली आकार के मॉडल होते हैं. पानी के अंदर मौजूद यह संरचनाएं अंतरिक्ष यात्रियों को उपकरण, हैंडल और अलग-अलग हिस्सों से परिचित होने में मदद करती हैं.
अंतरिक्ष में चलना फिरना पृथ्वी पर चलने से काफी अलग होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि वहां सामान्य गुरुत्वाकर्षण का सहारा नहीं होता. पानी के अंदर की प्रैक्टिस अंतरिक्ष यात्रियों को कंट्रोल तरीके से हिलने-डुलने और बिना किसी सहारे के अपने शरीर को सही स्थिति में रखना सिखाती है.
अंतरिक्ष यात्री मसल मेमोरी विकसित करने के लिए पानी के अंदर घंटों तक अलग-अलग चीजों की प्रैक्टिस करते हैं. इससे उन्हें यह याद रखने में मदद मिलती है कि उपकरणों को कैसे संभालना है, अंतरिक्ष यान की संरचनाओं के बीच कैसे घूमना है और वास्तविक मिशन के दौरान मुश्किल काम कैसे करने हैं.
पानी के अंदर की ट्रेनिंग अंतरिक्ष यात्रियों को ऐसे वातावरण में अपनी गतिविधियों को कंट्रोल करना सिखाती है जहां संतुलन बनाए रखने के लिए सामान्य तरीके काम नहीं करते.
अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष मिशन के दौरान आ सकने वाली आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रैक्टिस करते हैं. अगर स्पेस सूट में कोई भी खराबी आ जाए या फिर कोई दूसरी समस्या हो जाए तो वह शांत रहना और स्थिति को सुलझाने का प्रयास करना सीखते हैं.
पानी के अंदर की जाने वाली ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में काम करने के दौरान आने वाली शारीरिक और तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करना है.