Gold Control Act: घर पर क्यों नहीं रख सकते थे सोने की ईंट, जानें क्यों बनाया गया था यह कानून?

Gold Control Act: भारत में एक समय ऐसा था जब घर में सोने की ईंट और सोने के सिक्के रखना पूरी तरह से गैर कानूनी. 1968 के स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम के तहत सरकार ने देश के बिगड़ते विदेशी मुद्रा संकट और बढ़ती सोने की तस्करी से निपटने की कोशिश में सोने के कब्जे, बिक्री और निर्माण पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए थे. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
1968 में पेश किए गए स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम ने आम नागरिकों को शुद्ध सोने की ईंटें और सिक्के रखने से प्रतिबंधित कर दिया था. पहले से ही ऐसा सोना रखने वाले किसी भी व्यक्ति को इसे सरकार को घोषित करना होगा या फिर इसे आभूषणों में बदलवाना होगा. इससे निवेश ग्रेड सोने का निजी स्वामित्व अवैध हो गया.
इस कानून के पीछे सबसे बड़ी वजह भारत की गंभीर विदेशी मुद्रा की कमी थी. क्योंकि देश में घरेलू स्तर पर काफी कम सोने का उत्पादन होता था, बड़े पैमाने पर इंपोर्ट से कीमती विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो रहा था. 1962 के भारत चीन युद्ध के बाद ऐसा ज्यादा हुआ था.
अधिकारियों का ऐसा कहना था कि सोने की काफी ज्यादा मांग से भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है. सोने के स्वामित्व को बैन करके, सरकार को यह उम्मीद थी कि लोग अपनी बचत को कीमती धातु के बजाय उत्पादक क्षेत्र और बैंक में निवेश करेंगे.
इंपोर्ट बैन और उच्च मांग की वजह से सोने की तस्करी एक बड़ी चुनौती बन गई थी. सरकार ने माना की सोने की ईंटों और सिक्कों के निजी स्वामित्व पर बैन लगाने से तस्करों के लिए देश के अंदर अवैध रूप से आयातित सोना बेचना मुश्किल हो जाएगा.
इस अधिनियम में कई सख्त नियम लागू किए गए थे. इसमें डीलर और सुनार के लिए सोना रखने की सीमा भी शामिल है.
मांग को कम करने के बजाय बैन ने भूमिगत बाजार, हवाला नेटवर्क और वैध सोने के व्यापार के विकास को प्रोत्साहित किया. इस नीति से हजारों सुनार और कारीगरों को काफी नुकसान हुआ. आखिरकार सरकार ने जून 1990 में स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम को खत्म कर दिया.