सांप काटने पर सोने क्यों नहीं देते, क्या इससे बच जाती है जान?

Snake Venom: ऐसा कहा जाता है कि सांप के काटने के बाद पीड़ित को सोने नहीं देना चाहिए क्योंकि ऐसा करना घातक हो सकता है. हालांकि जागते रहने से सांप का जहर बेअसर नहीं होता या फिर जीवित रहने की गारंटी नहीं मिलती है. आइए जानते हैं फिर इसके पीछे क्या वजह है किताब के काटने के बाद सोने नहीं दिया जाता.
कोबरा और क्रेट जैसे सांपों का न्यूरोटॉक्सिक जहर तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है. इससे पलके झपकना, कमजोरी और काफी ज्यादा नींद जैसा महसूस हो सकता है. पीड़ित को रेस्पॉन्सिव बनाए रखने से यह पहचानना आसान हो जाता है कि उसकी स्थिति बिगड़ रही है या फिर नहीं.
सोते हुए व्यक्ति तब भी सामान्य दिखाई दे सकता है जब जहर चेतना को प्रभावित कर रहा हो. पीड़ित को जगाए रखना और उसके साथ बातचीत करने से देखभाल करने वालों को सामान्य नींद और जहर की वजह से कम हुई चेतना के बीच अंतर करने में मदद मिलती है.
कुछ न्यूरोटॉक्सिक सांप का जहर सांस लेने के लिए जिम्मेदार मांसपेशियों को कमजोर कर सकता है. एक पीड़ित जो बेहोश हो जाता है वह सांस लेने में मुश्किल की रिपोर्ट करने में असमर्थ हो सकता है. इससे संभावित जीवन घातक आपातकाल की पहचान में देरी हो सकती है.
पीड़ित से लगातार बात करने से देखभाल करने वालों को सतर्कता और प्रतिक्रिया में बदलाव देखने में मदद मिलती है. प्रतिक्रिया करने में मुश्किल यह संकेत दे सकती है कि जहर तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर रहा है.
जागते रहने से जहर को फैलने से नहीं रोका जा सकता या फिर उसके प्रभाव को नहीं रोका जा सकता. अगर सांप जहरीला था तो संकेत मिलने पर एंटी वेनम सहित सिर्फ उचित चिकित्सा उपचार ही खतरे का समाधान कर सकता है.
सांप के काटने के बाद पीड़ित को शांत रहना चाहिए क्योंकि बेवजह की हलचल से रक्त संचार बढ़ सकता है. तत्काल चिकित्सा देखभाल की व्यवस्था करते समय काटे गए अंग को स्थिर रखा जाना चाहिए.
घड़ी, अंगूठी और दूसरे तंग कपड़े या फिर सहायक उपकरण प्रभावित अंग से हटा दिए जाने चाहिए क्योंकि काटने के बाद सूजन बढ़ सकती है. इसके बाद पीड़ित को बिना देर किए अस्पताल ले जाना चाहिए.
काटने वाली जगह को काटा नहीं जाना चाहिए और जहर को कभी भी मुंह से नहीं चूसना चाहिए. घरेलू उपचार पर भी समय बर्बाद नहीं करना चाहिए, तत्काल अस्पताल उपचार प्राथमिकता है.