Light Pollution: अब क्यों नहीं देखने को मिलती चांदनी रातें, जानें क्यों कम होती जा रही चांद की रोशनी?
आर्टिफिशियल रोशनी जैसे कि स्ट्रीट लाइट, इमारतें और गाड़ियों की हेडलाइट के तेजी से फैलने की वजह से एक ऐसी चीज पैदा हो गई है जिसे स्काई ग्लो कहते हैं. यह आर्टिफिशियल चमक रात के आसमान के कुदरती अंधेरे पर हावी हो जाती है. जिस वजह से चांद की हल्की रोशनी काफी कम दिखाई देती है.
रिसर्च से ऐसा पता चलता है कि दुनिया की लगभग 80% आबादी अब ऐसे इलाकों में रहती है जहां लाइट पॉल्यूशन का असर है. इसका मतलब है कि ज्यादातर लोग शायद ही कभी सचमुच चांदनी रातों का अनुभव कर पाते हैं.
वातावरण में मौजूद धूल, धुआं और बारीक कण जैसी गंदगी चांद की रोशनी को बिखेर देती है और सोख लेती है. इससे ना सिर्फ उसकी चमक कम हो जाती है बल्कि उसका रंग भी बदल जाता है.
मौसम के बदलते मिजाज की वजह से आसमान में बादलों की परत और धुंध ज्यादा दिखाई देने लगी है. ये बादल चांद की रोशनी को जमीन तक पहुंचने से पहले ही रोक लेते हैं. इस वजह से उन रातों में भी रोशनी कम दिखाई देती है जो आमतौर पर साफ होती हैं.
वैज्ञानिकों ने धरती की चमक में बदलाव देखे हैं. इसे एल्बेडो कहते हैं. चमक में कमी की वजह से यह बात थोड़ी बहुत बदल जाती है की धरती पर रोशनी कैसे दिखाई देती है. इससे रात का आसमान और भी धुंधला दिखाई देने लगता है.
पहले लोग ज्यादातर समय बाहर कुदरती अंधेरे में बिताते थे. इससे उनकी आंखें कम रोशनी में देखने की आदी हो जाती थीं. आज हर समय आर्टिफिशियल रोशनी में रहने की वजह से हमारी रात में देखने की क्षमता कमजोर हो गई है.