Airplane Windows: फ्लाइट की खिड़कियां क्यों होती है गोल, जानें क्यों होता है इनमें एक छोटा सा छेद?
हवाई जहाज ऊंचाई पर उड़ते हैं और वहां पर बाहरी वायुदाब केबिन के अंदर की तुलना में काफी ज्यादा कम होता है. यह दबाव विमान की अंतर संरचना और खास तौर से खिड़कियों पर भारी दबाव डालता है. गोल खिड़कियां इस दबाव को पूरी सतह पर समान रूप से बांटने में मदद करती हैं.
विमान के शुरुआती दिनों में खिड़कियां चकोर ही हुआ करती थीं. हालांकि कानों पर दबाव जमा हो जाता था. इसी के साथ खिड़कियों में दरार पड़ने या फिर टूटने का खतरा बढ़ जाता था. इस डिजाइन को 1950 के दशक में हुई कई दुर्घटनाओं के बाद बनाया गया.
उड़ान के दौरान विमान बार-बार दबाव का अनुभव करता है. गोल खिड़कियां धातु के फ्रेम पर तनाव को काम करती हैं और विमान के जीवन काल को बढ़ाती हैं.
हर खिड़की में एक छोटा सा छेद होता है जिसे ब्लीड होल या ब्रीदर होल कहते हैं. यह छेद केबिन और खिड़की की परतों के बीच वायुदाब के अंतर को प्रबंधित करके सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाता है.
खिड़की की सबसे बाहरी परत केबिन और बाहरी हवा के बीच के अंतर का सारा दबाव झेल लेती है. वह छोटा सा छेद हवा को बीच में बहाने देता है ताकि दबाव समान हो जाए और बाहरी शीशे पर तनाव कम हो.
ऊंचाई पर तापमान काफी कम होता है जिस वजह से खिड़कियों की परतों के बीच ढूंढ पड़ सकती है और शिक्षा धुंधला हो सकता है. यह छेद नमी को बाहर निकलने देता है ताकि कोहरा या बर्फ जमने से बचाव हो.