देश के किस शहर में ड्रेनेज सिस्टम सबसे खराब, किस नंबर पर दिल्ली?

Delhi Drainage System: मंगलवार को दिल्ली में कुछ घंटे तक भारी बारिश देखने को मिली. इसके बाद गर्मी से तो राहत मिली लेकिन शहर की लंबे समय से चली आ रही जल निकासी की समस्या भी सामने आ गई. कई सड़कें पानी में डूब गई, ट्रैफिक थम गया और थोड़ी ही देर की बारिश में कई इलाके पानी से भरे तालाब जैसे लगने लगे. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत के किन शहरों में ड्रेनेज की सबसे ज्यादा समस्या है और दिल्ली इस मामले में किस नंबर पर आती है.
ना तो भारत सरकार और ना ही कोई अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ड्रेनेज सिस्टम के आधार पर शहरों की कोई आधिकारिक रैंकिंग जारी करती है. आमतौर पर मूल्यांकन बार-बार होने वाले जल भराव, इंफ्रास्ट्रक्चर की क्वालिटी और बाढ़ प्रबंधन के आधार पर किया जाता है.
भारत के बड़े महानगरों में गुरुग्राम, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु को ऐसे शहरों के तौर पर देखा जाता है जहां ड्रेनेज सिस्टम पर काफी ज्यादा दबाव है. इसकी वजह मानसून में बार-बार आने वाली बाढ़ और तेजी से हो रहा शहरीकरण है.
दिल्ली एनसीआर इलाके में गुरुग्राम को अक्सर बाढ़ के सबसे ज्यादा आशंका वाले शहर के तौर पर देखा जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां पर बारिश के पानी का प्रबंध काफी ज्यादा खराब है. वहीं नोएडा का ड्रेनेज नेटवर्क इस इलाके में सबसे बढ़िया और कुशल माना जाता है.
दिल्ली का ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग पांच दशक पहले तैयार किए गए मास्टर प्लान पर आधारित है. उस वक्त शहर की आबादी करीब 60 लाख थी. आज 2 करोड़ से ज्यादा निवासियों के साथ इस सिस्टम पर काफी ज्यादा दबाव है.
राजधानी का ड्रेनेज नेटवर्क रोजाना लगभग 50 मीमी बारिश को संभालने के लिए डिजाइन किया गया था. लेकिन मौसम के बदलते पैटर्न की वजह से अब अक्सर कुछ ही घंटे में 100 मीमी से ज्यादा बारिश हो जाती है.
तेजी से हो रहे शहरीकरण और अवैध अतिक्रमण ने शहर के प्राकृतिक जल निकासी रास्तों को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है. रिपोर्ट से पता चलता है कि 44 प्राकृतिक नाले गायब हो चुके हैं.
सीएजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के सिर्फ 40% नालों की ही रोजाना सफाई की जाती है. कई नाले प्लास्टिक कचरे, कूड़े और गाद से भरे रहते हैं.
दिल्ली के ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर को पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, डीडीए और दिल्ली जल बोर्ड जैसी कई एजेंसियां संभालती हैं. मानसून के दौरान बाढ़ से निपटने की शहर की तैयारी पर काफी बुरा असर पड़ता है.