Opium Cultivation India: कहां है देश की अफीम बेल्ट, यहां कितनी होती है इसकी खेती?
भारत की अफीम बेल्ट का मतलब तीन राज्यों के उन सरकारी नोटिफाइड जिलों से है जहां पर लाइसेंस वाले किसानों को कानूनी तौर पर अफीम पोस्त की खेती करने की इजाजत दी गई है. इन इलाकों पर केंद्रीय एजेंसी द्वारा कड़ी निगरानी रखी जाती है.
मध्य प्रदेश भारत के अफीम उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान देता है. मंदसौर, नीमच और रतलाम जैसे जिले उत्पादन के केंद्र हैं. इनमें से अकेले मंदसौर का राष्ट्रीय उत्पादन में काफी बड़ा हिस्सा है जो इसे अफीम बेल्ट की रीढ़ बनाता है. यहां लगभग 54500 किसान अफीम की खेती करते हैं.
राजस्थान में चित्तौड़गढ़, झालावाड़, प्रतापगढ़, कोटा और भीलवाड़ा जैसे जिलों को आधिकारिक तौर पर अफीम की खेती के लिए अनुमति मिली हुई है. चित्तौड़गढ़ और झालावाड़ मिलकर राज्य में सबसे ज्यादा उत्पादन करते हैं. मध्य प्रदेश के मंदसौर के साथ मिलकर ये क्षेत्र भारत की कुल कानूनी अफीम खेती में लगभग 80% का योगदान देते हैं. राजस्थान में लगभग 47000 किसान अफीम उगाते हैं.
उत्तर प्रदेश की भूमिका छोटी लेकिन काफी महत्वपूर्ण है. गाजीपुर, बाराबंकी और बरेली को अफीम की खेती के लिए अनुमति दी गई है. गाजीपुर खास तौर पर जरूरी है क्योंकि यह दुनिया की सबसे पुरानी अफीम फैक्ट्री में से एक है. इस फैक्ट्री को औपनिवेशिक काल के दौरान स्थापित किया गया था. उत्तर प्रदेश में लगभग 10,500 किसान अफीम उगाते हैं.
आने वाले फसल वर्ष के लिए लगभग 1.21 लाख किसानों को लाइसेंस मिलने की उम्मीद है. यह पिछले साल की तुलना में 23% से ज्यादा की बढ़ोतरी है. किसानों को सख्त मानकों को पूरा करना होगा.
भारत के पास एक खास ग्लोबल दर्जा है. यह संयुक्त राष्ट्र के कन्वेंशन के तहत अफीम का गोंद पैदा करने वाला अकेला देश है जिसे कानूनी तौर पर इसकी इजाजत है. पूरी फसल को सिर्फ सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स ही खरीदता है.