हवा को चीरते विमान की फुल स्पीड कितनी होती है? आंकड़ों से समझें पूरा गणित
हवाई जहाज की स्पीड एक जैसी नहीं रहती है. यह इस बात पर निर्भर करती है कि विमान किस तरह का है, कितनी ऊंचाई पर उड़ रहा है और उसका इंजन कितना ताकतवर है. आम यात्री विमान जब रनवे पर दौड़ता है तो टेकऑफ के समय उसकी रफ्तार करीब 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचती है.
इतनी स्पीड मिलते ही पंख हवा में उठाने लायक लिफ्ट बना लेते हैं और विमान उड़ान भर लेता है. आसमान में एक निश्चित ऊंचाई पर पहुंचने के बाद विमान अपनी क्रूज स्पीड पकड़ता है. ज्यादातर कमर्शियल जेट 800 से 900 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ते हैं.
कुछ बड़े विमान 900 से 950 किलोमीटर प्रति घंटा तक भी जा सकते हैं, लेकिन सुरक्षा और ईंधन बचत के कारण वे हमेशा अपनी अधिकतम सीमा पर नहीं उड़ते हैं. जब विमान अपने गंतव्य के पास पहुंचता है तो उसकी स्पीड कम की जाती है.
लैंडिंग के समय यह लगभग 230 से 260 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच रहती है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि रनवे पर सुरक्षित तरीके से टचडाउन हो सके. तेज रफ्तार पर उतरना खतरनाक हो सकता है.
जहां आम यात्री विमान ध्वनि की गति से कम उड़ते हैं, वहीं फाइटर जेट उससे कहीं ज्यादा तेज होते हैं. सुखोई-30 एमकेआई, राफेल या एफ-16 जैसे लड़ाकू विमान 2,000 से 2,500 किलोमीटर प्रति घंटा तक की अधिकतम गति हासिल कर सकते हैं. ये ध्वनि की गति यानी करीब 1,235 किलोमीटर प्रति घंटा से भी आगे निकल जाते हैं.
इतिहास में कॉनकॉर्ड नाम का सुपरसोनिक यात्री विमान भी रहा, जो करीब 2,180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकता था. हालांकि ज्यादा ईंधन खर्च और लागत के कारण अब यह सेवा में नहीं है.
विमान की रफ्तार सिर्फ इंजन की ताकत से तय नहीं होती है. हवा की दिशा, ऊंचाई, वजन और मौसम भी असर डालते हैं. पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल हर उड़ान में स्पीड का संतुलन बनाए रखते हैं ताकि सफर सुरक्षित और किफायती रहे.