Hajj Policy 2027: क्या है हज पॉलिसी, इसमें किन नियमों का जिक्र? हज पर जाने वालों के लिए काम की खबर

Hajj Policy 2027: भारतीय यात्रियों के लिए हज यात्रा को सुरक्षित, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने हज पॉलिसी 2027 का ऐलान किया है. इस नई पॉलिसी का मकसद सख्त पात्रता नियम, बेहतर हेल्थ चेकअप, डिजिटल सेवा और सऊदी अरब में बेहतर सुविधाओं के जरिए हज को और भी ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है. आइए जानते हैं क्या है यह हज पॉलिसी और इसमें किन नियमों को शामिल किया गया है.
आवेदकों के पास मशीन रीडेबल भारतीय पासपोर्ट होना चाहिए. यह कम से कम 31 दिसंबर 2027 तक वैलिड होना चाहिए. सरकार ने आवेदन फार्म में सरनेम या फिर आखरी नाम लिखना भी जरूरी कर दिया है. ऐसा इसलिए क्योंकि जानकारी छूटने से हज यात्रा के दौरान वेरिफिकेशन और विजा प्रोसेसिंग में दिक्कत आ सकती है.
हज कमिटी ऑफ इंडिया का कोटा जीवन में एक बार के सिद्धांत पर ही काम करता है. यानी की कोई व्यक्ति इस सुविधा का फायदा सिर्फ एक बार ही उठा सकता है. साथ ही 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के यात्रियों को लॉटरी सिस्टम में ही प्राथमिकता दी जाएगी. ऐसा इसलिए ताकि बुजुर्ग आवेदकों को हज करने का बेहतर मौका मिल सके.
हज की शारीरिक चुनौती और मौसम की मुश्किल स्थिति की वजह से 65 साल या फिर उससे ज्यादा उम्र के यात्रियों को अकेले यात्रा करने की इजाजत नहीं दी गई है. 45 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं बिना पुरुष अभिभावक के हज पर जा सकती हैं. यह तभी मुमकिन है अगर वे कम से कम चार महिलाओं के समूह का हिस्सा बनकर यात्रा करती हैं.
सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा को पक्का करने के लिए सख्त मेडिकल पात्रता नियम लागू किए हैं. गंभीर पुरानी बीमारी या फिर गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों से जूझ रहे लोगों को यात्रा करने की इजाजत नहीं दी गई है. इससे अलावा यात्रा से पहले पोलियो और मेनिनजाइटिस जैसी बीमारियों के लिए वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट भी लगेगा.
पूरी आवेदन, पेमेंट और ट्रैकिंग प्रक्रिया हज कमेटी की वेबसाइट और हज सुविधा मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए ऑनलाइन पूरी की जा सकती है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डॉक्युमेंट वेरीफिकेशन, फ्लाइट अलॉटमेंट और शिकायतों के समाधान में मदद करेगा. इसी के साथ यात्रियों को हिंदी, उर्दू और क्षेत्रीय भाषा में मदद के लिए एक मल्टी-लिंगुअल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वॉइस असिस्टेंट भी तैयार किया जा रहा है.
इस नई नीति के तहत भारत के हज कोटा का 70% हिस्सा हज कमिटी ऑफ इंडिया संभालेगी और बाकी का 30% हिस्सा प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स को दिया जाएगा.