गोबर से कैसे बनती है CNG, क्या घर पर भी बना सकते हैं गैस?

आजकल खेती-किसानी के साथ कमाई का नया जरिया ढूंढ रहे लोगों के लिए गोबर से सीएनजी बनाने का बिजनेस एक बेहतरीन ऑप्शन बनकर आया है. पशुपालकों के पास गोबर की कोई कमी नहीं होती. इस वेस्ट मटीरियल को सही तकनीक से प्रोसेस करके कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी सीएनजी में बदला जा सकता है.
इस बिजनेस को शुरू करने के लिए सरकार भी बायोगैस और सीएनजी प्लांट लगाने पर भारी सब्सिडी और लोन की सुविधा दे रही है. अगर आप सही प्लानिंग के साथ इसका प्लांट सेटअप करते हैं. तो यह हर महीने लाखों की मोटी और पक्की कमाई का एक शानदार और परमानेंट जरिया बन सकता है.
अब बात करते हैं कि क्या इसे घर पर बनाया जा सकता है? तो जवाब है कि घर पर आप छोटे लेवल पर बायोगैस तो जरूर बना सकते हैं. लेकिन गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी बनाना घर पर मुमकिन नहीं है. सीएनजी बनाने के लिए बहुत बड़े प्लांट, हैवी मशीनों और कड़े सेफ्टी स्टैंडर्ड्स की जरूरत होती है.
सीएनजी बनाने का प्रोसेस थोड़ा बड़ा होता है. सबसे पहले भारी मात्रा में गोबर इकट्ठा करके उसे पानी के साथ मिक्स किया जाता है और एक बड़े डाइजेस्टर टैंक में डाला जाता है. यहां गोबर के सड़ने से बायोगैस बनती है जिसमें मीथेन के साथ कार्बन डाइऑक्साइड और कई तरह की अशुद्धियां मौजूद होती हैं.
इस बायोगैस को गाड़ियों में भरने लायक सीएनजी बनाने के लिए सबसे पहले उसे प्यूरीफिकेशन यूनिट में भेजा जाता है. वहां एडवांस फिल्टरेशन तकनीक की मदद से गैस में मौजूद नमी, कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी अशुद्धियों को पूरी तरह अलग किया जाता है. जिससे सिर्फ प्योर मीथेन गैस ही बचती है.
प्रोसेस होने के बाद जो मीथेन गैस बचती है उसे कंप्रेसर मशीन की मदद से बहुत हाई प्रेशर पर कंप्रेस किया जाता है. इस हाई प्रेशर गैस को ही हम बायो-सीएनजी कहते हैं. इसके बाद इसे बड़े-बड़े सिलेंडरों में भरकर मार्केट में गाड़ियों और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए सप्लाई के लिए भेज दिया जाता है.
सीएनजी गैस बनने के अलावा इस बिजनेस में एक और बड़ा फायदा है. गोबर के सड़ने के बाद जो वेस्ट बचता है वह फसलों के लिए ऑर्गेनिक खाद का काम करता है. इस खाद को किसान अपने खेतों में यूज कर सकते हैं या फिर मार्केट में पैकेट बनाकर बेचकर एक्स्ट्रा मुनाफा कमा सकते हैं.