Vegan Vs Vegetarian: क्या होता है वीगन और वेजिटेरियन के बीच अंतर, जानें दोनों की डाइट के बीच का फर्क?
वीगन और शाकाहारी खाने के बीच सबसे बड़ा अंतर पशु उत्पादों के बहिष्कार की एक सीमा है. दरअसल शाकाहारी पशु मांस खाने से बचते हैं. ये मांस, मछली या फिर मुर्गी नहीं खाते, लेकिन डेयरी प्रोडक्ट्स खा सकते हैं. वहीं वीगन मांस, मछली तो दूर पशु उत्पाद जैसे कि सभी डेयरी प्रोडक्ट्स तक छोड़ देते हैं. ये शहद तक छोड़ देते हैं.
वेजीटेरियन सब्जियां, फल, अनाज, दाल, मेवे सब कुछ खाते हैं. इसी के साथ वे दूध, दही, मक्खन और पनीर जैसी डेयरी आधारित चीजों का भी आनंद लेते हैं.
वीगन पूरी तरह से प्लांट बेस्ड डाइट लेते हैं. ये किसी भी प्रकार के पशु उत्पाद को नहीं खाते. ये दूध की जगह बादाम या फिर सोया दूध का इस्तेमाल करते हैं. इसी के साथ यह प्लांट बेस्ड चीज का इस्तेमाल करते हैं और शहद के बजाय प्राकृतिक मिठास को पसंद करते हैं.
कई वीगन के लिए यह सिर्फ स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि एक नैतिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण भी है. वीगन का उद्देश्य सभी तरीके से जानवरों को होने वाले नुकसान को कम करना है. ये चमड़ा, ऊन, रेशम और जानवरों पर परीक्षण किए गए सौंदर्य प्रसाधनों से भी परहेज करते हैं. वेजिटेरियन के भी नैतिक मूल्य समान ही होते हैं लेकिन अक्सर वे इन्हें जीवन शैली उत्पादों पर उतनी शक्ति से लागू नहीं करते.
दोनों ही आहार अगर अच्छे से नियोजित किए जाएं तो काफी ज्यादा पौष्टिक हो सकते हैं. हालांकि वीगन को विटामिन बी12, आयरन, कैल्शियम और ओमेगा 3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्वों का ख्याल रखना चाहिए. यह सभी चीज मुख्य रूप से पशु आधारित खाद्य पदार्थों में पाई जाती हैं. वही वेजिटेरियन के लिए डेयरी को शामिल करने से आमतौर पर बिना किसी पूरक आहार के इन पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना काफी ज्यादा आसान होता है.
भारत देश में शाकाहार का एक काफी लंबा सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास रहा है. इस देश में यह अहिंसा और पवित्रता की परंपराओं से जुड़ा हुआ है. हालांकि वीगन अब एक नया वैश्विक आंदोलन बन चुका है, जो पशु अधिकारों और जलवायु परिवर्तन पर बढ़ती चिंताओं की वजह से पश्चिमी देशों में काफी ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है.