क्या होती है इद्दत, क्यों इस पीरियड में दूसरा निकाह नहीं कर सकतीं मुस्लिम महिलाएं?
इद्दत एक इंतजार का टाइम होता है, जिसका पालन किसी महिला को तब करना होता है, जब उसके शौहर की मौत हो जाती है. इन दिनों में एक महिला तय वक्त तक शादी नहीं कर सकती है.
इसका वक्त करीब चार महीने लंबा होता है. तलाक के बाद इंतजार की इस अवधि को मानना जरूरी होता है. वैसे तो इस पीरियड को कुरू कहा जाता है, लेकिन आम बोलचाल में इसे इद्दत भी कहते हैं.
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि महिला प्रेग्नेंट तो नहीं है. अगर इद्दत का समय पूरा किए बगैर महिला शादी कर लेती है और बाद में प्रेग्नेंसी सामने आए तो बच्चे की वैधता पर शक होता है.
इसी शक को दूर करने के लिए इद्दत की अवधि होती है, ताकि अगर प्रेग्नेंसी हो तो उसका पता चल जाए. इसमें अगर महिला गर्भवती है तो बच्चे के जन्म तक वो दूसरी शादी नहीं कर सकती है.
इसका मकसद एक नए रिश्ते के महिला को पूरी तरह से तैयार करना भी होता है. इस दौरान अगर महिला दूसरी शादी कर ले तो शरीयत के अनुसार उस संबंध को गैर इस्लामिक माना जाएगा.
इस वेटिंग टाइम के दौरान महिला को अपने पति के घर पर ही रहना होता है. इस टाइम के दौरान महिला को साधारण तरीके से रहना होता है, मेडिकल इमरजेंसी के दौरान ही वो घर से बाहर केवल उसी शख्स के साथ जा सकती है, जिसके साथ वह इस्लामी कानून के अनुसार शादी नहीं कर सकती.
इस दौरान महिला सज-संवर नहीं सकती और चमक-दमक वाले रेशमी कपड़े नहीं पहन सकती है. इद्दत का यह समय केवल महिलाओं पर लागू होता है.