यहां सजता है मियां-बीवी का बाजार, मंडी से दूल्हा-दुल्हन खरीदते हैं लोग; मां-बाप लगाते हैं बोली
शंघाई के बीचोंबीच स्थित पीपुल्स पार्क हर वीकेंड दोपहर के वक्त किसी मेले से कम नहीं लगता, लेकिन यहां न झूले हैं, न खाने-पीने के स्टॉल, यहां लगता है चीन का सबसे अनोखा बाजार, जिसे लोग ‘मैरिज मार्केट’ कहते हैं.
इस बाजार में न खरीदार हैं न विक्रेता, लेकिन सौदा फिर भी होता है शादी का. यहां सैकड़ों मां-बाप अपने बच्चों की फोटो, उम्र, लंबाई, वेतन, नौकरी, और यहां तक कि हॉबीज तक लिखी ए4 शीट्स छाते या बोर्ड पर चिपकाते हैं, ताकि कोई उपयुक्त जीवनसाथी मिल जाए.
यह परंपरा 1996 में शुरू हुई थी, जब चीन की वन-चाइल्ड पॉलिसी ने समाज में असंतुलन पैदा कर दिया था. लाखों परिवारों ने बेटों को प्राथमिकता दी, जिसके चलते आज वहां करीब 4 करोड़ पुरुष ऐसे हैं जिनके लिए जीवनसाथी मिलना कठिन हो गया है.
दूसरी ओर, जो महिलाएं करियर या आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देती हैं, उन्हें समाज शेंग नू यानी बची हुई लड़कियां कहकर ताने देता है.
2025 में चीन की जनसंख्या घटकर 13.9 लाख कम हो गई, जिससे सरकार की चिंता और बढ़ गई है. जन्म दर ऐतिहासिक रूप से नीचे चली गई है और शादियों की संख्या में पिछले साल की तुलना में 17% की गिरावट आई है.
इसी बीच, शंघाई का यह मैरिज मार्केट माता-पिता के लिए उम्मीद की आखिरी किरण बन गया है. यहां बच्चों के मां-बाप भी अपने लड़के-लड़कियों की खूबियां बताते हुए उनके लिए जीवनसाथी तलाशते हैं. चीन के युवा अब शादी को मजबूरी नहीं, विकल्प के रूप में देखने लगे हैं.
महंगाई, बढ़ते मकान दाम और करियर के दबाव के बीच वे स्वतंत्र जीवन पसंद करते हैं, लेकिन माता-पिता के लिए मैरिज मार्केट उनके बच्चों के भविष्य का टिकट बन चुका है. दिलचस्प बात यह है कि अब यह ट्रेंड सिर्फ शंघाई तक सीमित नहीं रहा. बीजिंग, चेंगदू, ग्वांगझो और अन्य शहरों में भी इसी तरह के विवाह बाजार देखने को मिल रहे हैं.