चमड़ी तक को चिपका देता है लेकिन अपनी ही बोतल में क्यों नहीं चिपकता फेवीक्विक? क्या है इसके पीछे का साइंस

घर में जब भी कोई भी प्लास्टिक का सामान, खिलौना या कांच का कुछ सामान टूटता है तो सबसे पहले फेवीक्विक की याद आती है. महज चंद रुपये में मिलने वाला यह छोटा सा ग्लू चंद सेकेंड में सामान को ऐसे जोड़ते है, जैसे वह कभी टूटे ही न हों. लेकिन कई बार तो अगर यह आपके हाथ में लग जाए तो चमड़ी भी चिपका देता, जिसे छुड़ाना आफत का काम हो जाता है, लेकिन क्या आपके दिमाग में कभी यह सवाल आया है कि जो आपके हाथ तक को चिपका दे आखिर वह ग्लू खुद अपनी बोतल में क्यों नहीं चिपकता है. इसके पीछे विज्ञान का एक जादुई नियम काम करता है, चलिए जानें.
फेवीक्विक के इस सुपरफास्ट एक्शन के पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि साइनोएक्रिलेट नाम का ताकतवर केमिकल काम करता है. यही वह मेन लिक्विड है, जो फेवीक्विक को उसकी असली ताकत देता है.
आम गोंद या फेवीकोल की तरह इसे सुखाने के लिए घंटों का लंबा इंतजार नहीं करना होता है. इस केमिकल की सबसे बड़ी खूबी और कमी दोनों एक ही है- इसे काम करने के लिए सिर्फ नमी यानि पानी के बेहद छोटे कणों की जरूरत होती है.
जैसे ही इसे आसपास थोड़ी सी भी नमी मिलती है, यह तुरंत एक्टिव हो जाता है और एकदम कड़ा प्लास्टिक जैसा बॉन्ड बनाती है. अब सवाल है कि जब बाहरी सामान को यह इस तरह मजबूती से चिपकाता है, तो फिर बोतल के अंदर क्यों नहीं चिपकता है.
इसका राज छिपा है फेवीक्विक की खास पैकेजिंग और एयरटाइट तकनीक में. इस लिक्विड को फैक्ट्री में बोतल या ट्यूब के अंदर भरते हैं, इसलिए वहां के माहौल को पूरी तरह से नमी से मुक्त रखा जाता है. बोतल के अंदर जरा भी पानी के कण या हवा नहीं होती है.
जब तक साइनोएक्रिलेट केमिकल को हवा या नमी का साथ नहीं मिलता है, तब तक वह कोई रिएक्शन नहीं कर सकता है. इसीलिए यह महीनों तक दुकान और घरों में रखे रहने के बाद भी पूरी तरह से सुरक्षित रहता है.
आपने ध्यान दिया होगा कि जब एक बार फेवीक्विक की बोतल को खोलने के बाद अगर उसे अच्छे से दोबारा बंद न किया जाए और लंबे वक्त तक उसे ऐसे छोड़ दिया जाए तो वह अंदर ही अंदर पत्थर की तरह सख्त हो जाता है.
ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि बोतल का मुंह खुलते ही वातावरण ही हवा और नमी उसके अंदर चली जाती है. हवा के संपर्क में आते ही साइनोएक्रिलेट केमिकल तुरंत रासायनिक प्रक्रिया शुरू कर देता है और लिक्विड बोतल के अंदर ही जम जाता है. इसीलिए इसे टाइट बंद करने की सलाह दी जाती है.
क्या आप जानते हैं कि फेवीक्विक के इस केमिकल का इतिहास भी बहुत पुराना है. इसके केमिकल साइनोएक्रिलेट की खोज दुर्घटनावश दूसरे विश्व युद्ध के दौरान की गई थी. उस वक्त वैज्ञानिक सेना के लिए बंदूकों को एकदम साफ और पारदर्शी प्लास्टिक से बनाने की कोशिश कर रहे थे, उसी रिसर्च के दौरान इसकी खोज हुई थी.