चुकंदर से कैसे बनती है चीनी, 1 किलो में कितनी बनेगी?

त्योहारी सीजन के दस्तक के साथ मिठाइयों की मिठास पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि चीनी के दाम बढ़े हुए हैं. भारत दुनिया में दूसरा चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन आज ये हालत है कि बाहर से चीनी इंपोर्ट करने की जरूरत पड़ गई है. लेकिन शायद यह बात बहुत कम लोग जानते हों कि गन्ने के अलावा चुकंदर से विश्व में 20% चीनी बनाई जाती है. तो चलिए समझें कि 1 किलो चुकंदर से कितनी चीनी बनेगी.
आमतौर पर हम बाजार में जो लाल रंग का चुकंदर सलाद के रूप में देखते हैं, उससे बड़े पैमाने पर चीनी नहीं बनाई जाती है. इसके लिए खास किस्म के सफेद चुकंदर की खेती की जाती है. इस विशेष चुकंदर की जड़ों में सुक्रोज की मात्रा करीब 14% से 16% तक होती है.
कारखानों में जब इसे बनाया जाता है, तो सभी प्रक्रियाओं के बाद 13% से 15% की रिकवरी दर प्राप्त होती है. इसका मतलब है कि 1 किलोग्राम शुगर बीट से लगभग 130 से 150 ग्राम तक शुद्ध सफेद चीनी तैयार की जा सकती है. बाकी बचा हुआ हिस्सा पानी, रेशेदार गूदा और मोलेसिस के रूप में अलग निकल जाता है.
खेतों से जब चुकंदर की जड़ें फैक्ट्रियों तक पहुंचती हैं, तो सबसे पहले उनकी अच्छे से सफाई की जाती है. इसे ठीक से पानी से धोकर जड़ों पर चिपकी मिट्टी, कंकड़ और अशुद्धियों को पूरी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद मशीनों की मदद से इन्हें बहुत बारीक और पतली पट्टियों में काटा जाता है.
इन कटे हुए पतले टुकड़ों को तकनीकी भाषा में कॉसेट कहा जाता है. पतले टुकड़ों में काटने से जड़ों के अंदर मौजूद मीठे रस को बाहर निकालना बेहद आसान हो जाता है. कटे हुए चुकंदर के टुकड़ों से मीठा रस निकालने के लिए उन्हें बड़े-बड़े टैंकों में डाला जाता है.
इन टैंकों में तेजी से बहता हुआ गर्म पानी मिलाया जाता है. गर्म पानी का तापमान चुकंदर की कोशिकाओं को खोल देता है, जिससे उनके भीतर छिपा सारा प्राकृतिक सुक्रोज बिना किसी दबाव के आसानी से पानी में घुल जाता है. इस चरण के अंत में शर्करा से युक्त मीठा घोल अलग हो जाता है और चुकंदर का सूखा गूदा बाहर निकाल लिया जाता है.
डिफ्यूजर से निकले कच्चे रस में कई तरह की कार्बनिक अशुद्धियां, फाइबर और गंदगियां मौजूद होती हैं. इन्हें साफ करने के लिए रस में चूने का पानी मिलाया जाता है और साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है.
इस रासायनिक प्रक्रिया से अशुद्धियां आपस में चिपक कर भारी कण बन जाती हैं और नीचे बैठ जाती हैं. इसके बाद इस मिश्रण को फिल्टर मशीनों से छानकर एकदम साफ और पारदर्शी मीठा रस हासिल कर लिया जाता है.
सफाई के बाद मिले रस में पानी का अनुपात बहुत ज्यादा होता है. इसे गाढ़ा करने के लिए बड़े वैक्यूम बर्तनों में गर्म करके उबाला जाता है, जिससे अतिरिक्त पानी भाप बनकर उड़ जाता है और रस एक गाढ़ी चाशनी का रूप ले लेता है.
इस चाशनी को और अधिक गर्म करके उसमें चीनी के बारीक क्रिस्टल बीज के रूप में डाले जाते हैं. इससे चाशनी में चीनी के दाने बनने शुरू हो जाते हैं. इसके बाद हाई-स्पीड सेंट्रीफ्यूज मशीन से तेजी से घुमाकर चीनी के सफेद दानों को बचे हुए शीरे से अलग कर लिया जाता है. अंत में इन दानों को सुखाकर नमी मुक्त किया जाता है और थैलियों में पैक कर दिया जाता है.