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Iftar Rules Islam: क्या रोजा इफ्तार करना जरूरी है, इस्लाम में क्या है इफ्तारी मिस होने पर नियम?

स्पर्श गोयल   |  17 Mar 2026 02:18 PM (IST)
Iftar Rules Islam: क्या रोजा इफ्तार करना जरूरी है, इस्लाम में क्या है इफ्तारी मिस होने पर नियम?

Iftar Rules Islam: रमजान का पाक महीना अपने अंतिम चरणों में प्रवेश कर रहा है. सुबह से लेकर सूरज डूबने तक रोजेदार रोजा रखते हैं. इसी बीच एक बड़ा सवाल लोगों के मन में उठ रहा है कि क्या रोजा खोलना, यानी कि इफ्तार जरूरी है? साथ ही अगर कोई इसे छोड़ देता है तो क्या होगा? आइए जानते हैं क्या हैं इस्लाम में इफ्तारी मिस होने के नियम.

1

सूरज डूबने पर इफ्तार करना सुन्नत है. इस्लामी शिक्षाओं के मुताबिक किसी को भी सूरज डूबने के तुरंत बाद इफ्तार करना चाहिए और बेवजह की देरी से बचना चाहिए. तुरंत रोजा खोलना एक ऐसा काम माना जाता है जो अल्लाह को खुश करता है.

2

सुन्नत के मुताबिक खजूर और पानी के साथ इफ्तार की सलाह दी जाती है. रोजे के लंबे दिन के बाद खजूर तुरंत ऊर्जा देता है और पानी शरीर को फिर से हाइड्रेट करने में मदद करता है. अगर खजूर ना हो तो इफ्तार करने के लिए सिर्फ पानी पीना ही काफी है.

3

ऐसा माना जाता है कि इफ्तार के समय मांगी गई दुआ कबूल होती है. कई मुसलमान इस समय का इस्तेमाल क्षमा, आशीर्वाद और मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना करने में करते हैं.

4

अगर कोई व्यक्ति गलती से सूरज डूबने से पहले यह सोचकर कि इफ्तार का समय हो गया है, इफ्तारी कर लेता है तो आमतौर पर उसका रोजा अमान्य माना जाता है. इसके लिए उसे बाद में एक कजा रोजा रखना पड़ता है. हालांकि अगर कोई रोजे के दौरान गलती से कुछ खा-पी लेता है तो उसका रोजा मान्य रहता है और वह उसे जारी रख सकता है.

5

अगर इफ्तार के समय खाने के लिए कुछ भी ना हो तो भी वह रोजा तोड़ने का सिर्फ इरादा करके अपना इफ्तार पूरा कर सकता है. हालांकि बिना किसी सही वजह के जान बूझकर इफ्तार ना करना सही नहीं माना जाता.

6

अगर बीमारी या फिर सफर की वजह से रोजा छूट जाता है तो बाद में उसकी कजा के तौर पर एक रोजा रखना जरूरी है. ऐसे मामलों में जहां रोजा रखना हमेशा के लिए मुमकिन ना हो वहां फिदया यानी किसी गरीब व्यक्ति को खाना खिलाना जरूरी होता है. यह बुजुर्ग या फिर काफी ज्यादा बीमार लोगों के लिए होता है. अगर कोई व्यक्ति बिना किसी सही वजह के जान बूझकर रोजा तोड़ देता है तो उसे कफ्फारा देना पड़ता है. इसके तहत या तो लगातार 60 दिनों तक रोजा रखना होता है या फिर 60 जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाना होता है.

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