Mughal Princess Jahanara Begum: बेहद खूबसूरत थी इस मुगल शासक की बेटी, शहजादी की एक झलक के लिए तरसते थे लोग
जब 1631 ई. में मुमताज महल की मौत हो गई तो 17 साल की जहांआरा बेगम पर कई जिम्मेदारियां आ गई थीं. शाहजहां को भी अपनी इस बेटी पर बहुत भरोसा था. शाहजहां ने जहांआरा को तरजीह देते हुए उस मुगल साम्राज्य का पादशाह बेगम बना दिया था.
फ्रांसीसी इतिहासकार फ्रेंकोई बर्नियर की मानें तो शाहजहां के अपनी इस बेटी के साथ बेहद करीबी संबंध थे. कहा तो ये भी जाता है कि शाहजहां से जानबूझकर अपनी बेटी की शादी नहीं होने दी थी.
बर्नियर की मानें तो उन दिनों कुछ दरबारी भी ये बात कहते थे कि बादशाह ने जिस पेड़ को लगाया है, उसे उसका फल तोड़ने का पूरा हक है.
हालांकि इन सब बातों के बावजूद जहांआरा ने आठ साल तक आगरा किले के मुसम्मन बुर्ज में कैद अपने पिता की सेवा उनकी मौत तक की थी.
मुमताज महल की मौत के बाद उनकी संपत्ति का आधा हिस्सा शाहजहां ने जहांआरा को दे दिया था. इसी के चलते वो दुनिया की अमीर महिलाओं में से एक बन गई थी.
इतिहासनामा की मानें को जहांआरा बेगम को तकरीबन 2 करोड़ रुपये सालाना पॉकेट मनी को रूप में मिलते थे. जहांआरा के पास कई जागीरें थीं.
जहांआरा बेगम की खरीददारी के लिए ही शाहजहां ने चांदनी चौक का निर्माण करवाया था. चांदनी चौक का नक्शा भी जहांआरा बेगम ने तैयार किया था. कहा तो ये भी जाता है कि जहांआरा के कई प्रेमी थे जो कि चुपके से उनसे मिलने आते थे.