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LPG Loss: एक सिलेंडर बेचकर भी कितना घाटा उठा रही सरकार, जानें हर दिन का हिसाब-किताब?

स्पर्श गोयल   |  01 May 2026 04:41 PM (IST)
LPG Loss: एक सिलेंडर बेचकर भी कितना घाटा उठा रही सरकार, जानें हर दिन का हिसाब-किताब?

LPG Loss: 1 मई से दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹993 की भारी बढ़ोतरी के बाद इसकी कीमत बढ़ाकर ₹3071.50 हो गई है. जहां एक तरफ कमर्शियल इस्तेमाल करने वालों को इसकी मार झेलनी पड़ रही है वहीं घरेलू एलपीजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. इसी बीच आइए जानते हैं कि हर सिलेंडर को बेचकर भी कितना घाटा उठा रही है सरकार.

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तेल मार्केटिंग कंपनियों और सरकार को हर 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर लगभग ₹380 का नुकसान उठाना पड़ रहा है. यह अंतर इस वजह से है क्योंकि खुदरा कीमत असल बाजार कीमतों से कम रखी जा रही हैं.

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भारत में हर दिन लगभग 50 से 51 लाख घरेलू सिलेंडरों की सप्लाई की जाती है. जब आप इस संख्या को प्रति सिलेंडर ₹380 के नुकसान से गुणा करते हैं तो रोजाना का आर्थिक बोझ ₹190 करोड़ से भी ज्यादा हो जाता है.

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पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक मई के आखिर तक कुल नुकसान ₹40000 करोड़ से भी ज्यादा का हो सकता है.

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अंतर्राष्ट्रीय एलपीजी की बढ़ती कीमत ने लागत को 44% से भी ज्यादा बढ़ा दिया है. इसकी मुख्य वजह भू राजनीतिक तनाव है. हालांकि घरेलू कीमतों में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं की गई है. इस वजह से नुकसान का यह अंतर और भी बढ़ गया है.

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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर ₹300 की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है. जहां एक तरफ यह सब्सिडी कम आय वाले परिवारों को राहत देती है वहीं दूसरी तरफ यह पूरे सिस्टम पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को और भी बढ़ा देती है.

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यह नुकसान सिर्फ सरकार ही नहीं उठा रही. पिछले वित्तीय चक्र में लगभग ₹60,000 करोड़ के नुकसान को सरकार और तेल कंपनियों के बीच बराबर बांटा गया था.

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