✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो

यमुना नदी से क्यों खत्म हो रहीं देसी मछलियां, जानें इससे क्या होगा नुकसान?

नीलेश ओझा   |  01 May 2026 04:31 PM (IST)
यमुना नदी से क्यों खत्म हो रहीं देसी मछलियां, जानें इससे क्या होगा नुकसान?

यमुना नदी भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है. जिसकी लंबाई लगभग 1376 किलोमीटर है और यह यमुनोत्री से निकलकर प्रयागराज तक का सफर तय करती है. यह नदी उत्तर भारत के एक बहुत बड़े हिस्से की लाइफलाइन है.

1

यमुना नदी की पहचान रही रोहू और कतला जैसी देसी मछलियां अब धीरे-धीरे गायब हो रही हैं. जो एक बड़ा चिंता का विषय है. रिसर्च बताती है कि कभी यमुना में देसी मछलियों का बोलबाला था. लेकिन अब इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है. इसके पीछे बढ़ता प्रदूषण और नदी के इकोसिस्टम में होने वाले बदलाव बड़ी वजह माना जा रहा है.

Continues below advertisement
2

नदी में बढ़ती गंदगी और टॉक्सिक कचरा देसी मछलियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है. शहरों का गंदा पानी और फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल्स ने यमुना के पानी को इतना जहरीला बना दिया है कि उसमें ऑक्सीजन का लेवल गिर गया है. देसी मछलियां साफ पानी और पर्याप्त ऑक्सीजन के बिना सर्वाइव नहीं कर पा रही हैं.

Continues below advertisement
3

यमुना पर बने बांध और बैराज भी देसी मछलियों की कम होती संख्या के लिए जिम्मेदार हैं. ये मछलियां प्रजनन के लिए नदी के बहाव के साथ लंबी दूरी तय करती हैं, लेकिन बांधों की वजह से इनका रास्ता रुक जाता है. जब मछलियां अपने ब्रीडिंग ग्राउंड तक नहीं पहुंच पातीं तो उनकी अगली पीढ़ी का पैदा होना मुश्किल हो जाता है.

4

देसी मछलियों के खत्म होने की एक बड़ी वजह बाहरी प्रजातियां जैसे थाई मांगुर और ग्रास कार्प का बढ़ना है. ये विदेशी मछलियां काफी आक्रामक होती हैं और देसी मछलियों के भोजन और रहने की जगह पर कब्जा कर लेती हैं. कई बार ये विदेशी मछलियां हमारी स्थानीय प्रजातियों को खाकर उन्हें खत्म कर रही हैं.

5

मछलियों की इस कमी का सबसे बुरा असर हजारों मछुआरों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है. पहले मछुआरे जाल डालते थे तो उन्हें अच्छी मात्रा में कीमती देसी मछलियां मिल जाती थीं, लेकिन अब उनके हाथ खाली रहते हैं. देसी मछलियों के गायब होने से स्थानीय बाजार और उससे जुड़े परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है.

6

इकोसिस्टम के नजरिए से देखें तो देसी मछलियां नदी की सेहत बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होती हैं. ये मछलियां पानी में मौजूद काई और गंदगी को खाकर नदी को कुदरती तौर पर साफ रखने में मदद करती हैं. जब ये प्रजातियां खत्म होती हैं. तो नदी की गंदगी साफ करने की क्षमता कम हो जाती है और प्रदूषण बढ़ता है.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • एग्रीकल्चर
  • यमुना नदी से क्यों खत्म हो रहीं देसी मछलियां, जानें इससे क्या होगा नुकसान?
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.