बिजली के तार से चलने वाली ट्रेनों में लगा होता है जनरेटर, क्यों पड़ती है इसकी जरूरत?

आपने ट्रेन का सफर तो कई बार किया होगा. ट्रेनें न केवल हमें आरामदायक सफर की सुविधा देती हैं, बल्कि इसकी यात्रा काफी हद तक सस्ती भी होती है. एक समय था जब ट्रेनें भाप के इंजन से चला करती थीं, लेकिन अब ज्यादातर ट्रेनें बिजली से चलती हैं.
आपने रेलवे स्टेशनों पर पटरी के ऊपर ओवरहेड तारों को तो देखा ही होगा. वे वही तार होते हैं, जिससे ट्रेनों को बिजली मिलती है, लेकिन क्या कभी आपने इसमें जनरेटर यान लगा देखा है?
ट्रेनों में कई तरह के कोच होते हैं. इसमें स्लीपर, एसी, पेंट्रीकार की तरह जनरेटर यान भी लगा होता है. अब सवाल यह है कि जब ट्रेनें बिजली से चलती हैं और यह बिजली उसे अलग से मिलती है तो ट्रेनों में जनरेटर क्यों लगा होता है?
बता दें, जनरेटर यान उन ट्रेनों में लगा होता है, जिनमें एसी कोच ज्यादा होते हैं और जो लंबी दूरी तय करती हैं. खासतौर पर शताब्दी, दुरंतो, गरीब रथ, तेजस और राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में जनरेटर यान लगाया जाता है.
ट्रेनों में जनरेटर यान के अलावा इंजन के नीचे बैटरी भी लगाई जाती है, जो हमेशा चार्ज होती रहती है. यह बैटरी इमरजेंसी सिचुएशन में काम आती है.
हालांकि, इस बैटरी से भी काम नहीं चलता. अधिकारियों के मुताबिक, लंबी दूरी की ट्रेनों में अधिक पॉवर सप्लाई की जरूरत होती है. ऐसे में इन ट्रेनों को सिर्फ बैटरी या इलेक्ट्रिसिटी के सहारे नहीं चलाया जा सकता.
इसलिए ट्रेनों में जनरेटर यान लगाया जाता है, जिससे बिजली की भरपूर सप्लाई बनी रहे और एसी कोचो में भी किसी तरह की परेशानी न आए.