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LPG Cargo Ship Capacity: एक कार्गो शिप पर एक बार में कितनी आ सकती है LPG? एक क्लिक में जान लें लिमिट

निधि पाल   |  17 Mar 2026 11:07 PM (IST)
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एक बड़े एलपीजी कार्गो शिप को तकनीकी भाषा में वेरी लार्ज गैस कैरियर (VLGC) कहा जाता है. ये जहाज सामान्य जहाजों से बिल्कुल अलग होते हैं, क्योंकि इन्हें गैस को तरल अवस्था में रखने के लिए विशेष तापमान और दबाव की जरूरत होती है. आमतौर पर एक मानक वीएलजीसी जहाज एक बार में 40,000 से 55,000 मीट्रिक टन एलपीजी ढोने की क्षमता रखता है.

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आधुनिक इंजीनियरिंग की बदौलत अब ऐसे नए जहाज भी आ गए हैं जो 90,000 से 93,000 क्यूबिक मीटर तक गैस एक साथ ले जा सकते हैं. हाल ही में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा भारतीय जहाज 'शिवालिक' और कांडला पहुंचने वाला 'नंदा देवी' भारत की गैस जरूरतों के लिए संजीवनी की तरह हैं. इन दोनों जहाजों में मिलाकर लगभग 92,712 टन एलपीजी मौजूद है.

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आपको जानकर हैरानी होगी कि इतनी मात्रा भारत में पूरे एक दिन की कुकिंग गैस की कुल खपत के बराबर है. यानी महज दो जहाज पूरे देश का एक दिन का चूल्हा जलाने का दम रखते हैं. इसके साथ ही यूएई से आने वाला जहाज 'जग लाडली' भी कच्चे तेल की बड़ी खेप लेकर पहुंच रहा है.

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जहाज की क्षमता को अगर हम घर में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडरों के हिसाब से समझें, तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं. एक औसत वीएलजीसी जहाज, जो लगभग 46,000 से 55,000 टन गैस लेकर चलता है, वह अकेले ही करीब 32.4 लाख (3.24 मिलियन) मानक घरेलू सिलेंडरों को भरने के लिए पर्याप्त गैस लेकर आता है. यही कारण है कि जब समुद्र में तनाव के कारण एक भी जहाज रुकता है, तो देश के सप्लाई डिपो में हलचल मच जाती है.

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एलपीजी ले जाने वाले जहाज कई श्रेणियों में बंटे होते हैं. सबसे छोटे जहाजों को 'फुली प्रेशराइज्ड' कहा जाता है, जो 5,000 से 6,000 क्यूबिक मीटर गैस लाते हैं. इसके बाद सेमी-प्रेशराइज्ड या रेफ्रिजरेटेड जहाज आते हैं जिनकी क्षमता 5,000 से 20,000 क्यूबिक मीटर होती है.

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मिड-साइज जहाज 25,000 से 50,000 क्यूबिक मीटर तक माल ढोते हैं, लेकिन लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और भारत जैसे बड़े देशों की जरूरतों के लिए केवल वीएलजीसी जहाजों का ही इस्तेमाल मुख्य रूप से किया जाता है.

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तकनीकी विकास के इस दौर में साल 2023 में 'हारजंद' नाम का जहाज डिलीवर किया गया था, जो वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी कैरियर्स में शुमार है. इसकी क्षमता 93,000 क्यूबिक मीटर है. यह जहाज ड्यूल-फ्यूल तकनीक पर चलता है, यानी यह पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ इतनी अधिक ऊर्जा ले जा सकता है जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है.

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एलपीजी को जहाज में गैस के रूप में नहीं, बल्कि बेहद ठंडी और तरल अवस्था में ले जाया जाता है. इसके लिए जहाज के भीतर विशालकाय इंसुलेटेड टैंक होते हैं. अगर गैस को तरल न बनाया जाए, तो उसे ले जाने के लिए सैकड़ों गुना बड़े जहाजों की जरूरत पड़ेगी. तरल बनाने से कम जगह में ज्यादा मात्रा आ जाती है. बंदरगाह पर पहुंचने के बाद इस तरल को दोबारा गैसीय अवस्था या नियंत्रित तरल दबाव में टैंकरों में भरा जाता है, जो बाद में आपके नजदीकी बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचता है.

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