Ice Melting: कितने साल में पिघलेगी पूरी दुनिया की बर्फ, अगर सारी बर्फ पिघल गई तो क्या होगा?

Ice Melting: वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि पृथ्वी पर मौजूद बर्फ का विशाल भंडार जो 50 लाख क्यूबिक मील से भी ज्यादा है, धीरे-धीरे पिघल रहा है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर इसे पूरी तरह पिघलने में कितना समय लगेगा. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
पूरी धरती पर मौजूद बर्फ को पिघलने में 5000 साल से भी ज्यादा का समय लगेगा. हालांकि यह समय सीमा तय नहीं है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि इंसानों द्वारा किए गए उत्सर्जन की वजह से ग्लोबल वार्मिंग कितनी तेजी से बढ़ती है.
अगर सारी बर्फ पिघल जाए तो समुद्र का जलस्तर लगभग 66 से 70 मीटर तक बढ़ सकता है. मुंबई, न्यूयॉर्क शहर और टोक्यो जैसे बड़े तटीय शहर डूब जाएंगे. इतना ही नहीं बल्कि बांग्लादेश और नीदरलैंड जैसे नीचले इलाके वाले देश भी पूरी तरह से डूब जाएंगे.
बर्फ सूरज की रोशनी को वापस अंतरिक्ष में भेजने में एक बड़ी भूमिका निभाती है. इसके बिना पृथ्वी काफी ज्यादा गर्मी सोख लेगी. इससे ग्रह का औसत तापमान लगभग 14.4 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 26 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा हो सकता है.
ग्लेशियर अरबों लोगों के लिए ताजे पानी के प्राकृतिक भंडार का काम करते हैं. इनके खत्म हो जाने से महाद्वीपों में पानी की आपूर्ति बाधित हो जाएगी. इससे पीने, खेती और उद्योगों के लिए पानी की भारी कमी हो जाएगी.
बर्फ पिघलने से कई प्रजातियों के रहने की जगह तबाह हो जाएगी. पोलर बियर और पेंगुइन जैसे जानवर अपना प्राकृतिक वातावरण खो देंगे.
समुद्रों में ताजे पानी के अचानक आ जाने से उनके खारेपन का संतुलन बिगड़ जाएगा. इससे गल्फ स्ट्रीम जैसी प्रमुख समुद्री धाराएं बाधित हो सकती हैं. किसी भी तरह की बाधा से दुनिया भर में मौसम के एक्सट्रीम पैटर्न पैदा हो सकते हैं.