Mountain Formation: कैसे हुआ था पहाड़ों का निर्माण, क्या वक्त के साथ बढ़ती है इनकी ऊंचाई?

Mountain Formation: पहाड़ भले ही समय से परे और अटल दिखाई देते हैं लेकिन असल में वे पृथ्वी की सबसे खूबसूरत विशेषताओं में से एक हैं. उनका जन्म ग्रह की सतह के काफी नीचे मौजूद शक्तिशाली ताकत से जुड़ा है. आइए जानते हैं कि आखिर पहाड़ का निर्माण कैसे होता है और क्या वक्त के साथ-साथ उनके लंबाई भी बढ़ती है.
पृथ्वी पर पहाड़ तब बनते हैं जब दो टेक्टोनिक प्लेट टकराती हैं. एक प्लेट के नीचे धंसने के बजाय दोनों बहुत ज्यादा दबाव में सिकुड़ कर ऊपर की तरफ मुड़ जाती हैं. हिमालय तब बना जब लगभग 40 से 50 मिलियन साल पहले भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराई. इस वजह से जमीन ऊपर की तरफ धकेल दी गई और दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला बनी.
ज्वालामुखी पहाड़ तब बनते हैं जब पिघला हुआ मैग्मा पृथ्वी के अंदर से ऊपर उठता है और सतह पर फटता है. जैसे-जैसे लावा बार-बार फटने से ठंडा होकर सख्त होता है वह जमा होकर पहाड़ बनता रहता है.
कुछ इलाकों में तनाव की वजह से पृथ्वी की पपड़ी फॉल्ट के साथ टूट जाती है. जब जमीन का एक हिस्सा ऊपर उठता है और दूसरा नीचे धंसता है तो ब्लॉक पहाड़ बनते हैं. इन पहाड़ों के किनारे अक्सर खड़े और ऊपर से सपाट होते हैं.
पहाड़ों का बढ़ना बनने के बाद नहीं रुकता. हिमालय जैसी पर्वत श्रृंखलाओं के नीचे की प्लेटें अभी भी हिल रही हैं. भारतीय प्लेट लगातार उत्तर की ओर धकेल रही है, जिससे हिमालय हर साल कुछ मिलीमीटर ऊपर उठ रहा है.
यह सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन कटाव पहाड़ों को और ऊंचा बना सकता है. अरुण और कोसी जैसी नदियां पहाड़ों के निचले हिस्से से बड़ी मात्रा में चट्टान और मिट्टी को हटा देती हैं. जैसे ही यह वजन हटता है पृथ्वी की पपड़ी ऊपर उठकर प्रतिक्रिया करती है.
पर्वत श्रृंखलाओं के नीचे भूकंपीय गतिविधियों से अचानक वर्टिकल बदलाव हो सकते हैं. शक्तिशाली भूकंप कुछ सेकंड में जमीन के हिस्सों को ऊपर धकेल सकते हैं, जिस वजह से पहाड़ की ऊंचाई में बढ़ोतरी होती है.