✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो

भारतीयों को कैसे लगी चाय की लत, इससे पहले सुबह-सुबह दिन की शुरुआत कैसे करते थे लोग?

निधि पाल   |  27 Mar 2026 08:36 AM (IST)
भारतीयों को कैसे लगी चाय की लत, इससे पहले सुबह-सुबह दिन की शुरुआत कैसे करते थे लोग?

आज भारत के किसी भी घर में सुबह की दस्तक बिना चाय के अधूरी मानी जाती है. नींद खुलते ही हाथ में गर्म प्याली का होना अब एक रस्म बन चुका है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस चाय के बिना हमारा दिन शुरू नहीं होता, वह हमारी संस्कृति का हिस्सा थी ही नहीं है? सदियों तक आयुर्वेद और कुदरती पेयों पर निर्भर रहने वाले भारतीयों को आखिर चाय का चसका किसने और कैसे लगाया? यह कहानी केवल एक पेय की नहीं, बल्कि एक सोची-समझी व्यापारिक रणनीति की है जिसने हमारे सुबह के सुकून को हमेशा के लिए बदल दिया.

1

भारत में चाय का इतिहास बहुत पुराना नहीं है. 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेजों ने भारत में बड़े पैमाने पर चाय के बागान लगाए. उनका मुख्य उद्देश्य चाय को विदेशों में निर्यात करना था, लेकिन जब वैश्विक बाजार में मांग कम हुई, तो उन्होंने भारत को ही एक बड़ा बाजार बनाने का फैसला किया.

2

1920 से लेकर 1950 के बीच अंग्रेजों ने बेहद आक्रामक तरीके से चाय का प्रचार किया. रेलवे स्टेशनों और कारखानों में मुफ्त चाय पिलाने के स्टॉल लगाए गए ताकि लोगों को इसका स्वाद लग सके.

3

अंग्रेजों ने चाय को एक आधुनिक और ताजगी देने वाले पेय के रूप में पेश किया. उस दौर में अखबारों और पोस्टरों के जरिए चाय पीने के फायदों का प्रचार किया गया. लगभग 40 से 50 सालों तक लगातार कोशिशों के बाद भारतीयों की जुबान पर चाय का स्वाद चढ़ा.

4

1950 के दशक तक आते-आते चाय भारतीय रसोई का एक अनिवार्य हिस्सा बन गई. दिलचस्प बात यह है कि भारतीयों ने इसमें दूध और मसाले मिलाकर इसे मसाला चाय का अपना देसी रूप दे दिया, जो आज दुनिया भर में मशहूर है.

5

चाय के आने से पहले भारत में सुबह की शुरुआत के तरीके आज के मुकाबले कहीं ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक और प्राकृतिक थे. लोग मौसम और अपने काम की प्रकृति के हिसाब से पेय पदार्थों का चुनाव करते थे. सुबह का समय शरीर को ऊर्जा देने और पेट को साफ रखने वाले ड्रिंक्स के लिए समर्पित था.

6

आज की तरह कैफीन की लत के बजाय तब लोग ऐसे तरल पदार्थों का सेवन करते थे जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत करते थे. ग्रामीण भारत में सुबह-सुबह जड़ी-बूटियों से बना काढ़ा पीने की पुरानी परंपरा थी. तुलसी की पत्तियां, अदरक, काली मिर्च और गुड़ को पानी में उबालकर तैयार किया गया यह मिश्रण औषधि का काम करता था.

7

यह सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि मौसमी बीमारियों से बचने के लिए पीया जाता था. आज भी जब हमें सर्दी या जुकाम होता है, तो हम इसी काढ़े की शरण में जाते हैं, लेकिन पुराने समय में यह हर सुबह का नियमित हिस्सा हुआ करता था. उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सुबह के समय ताजी छाछ या मट्ठे का सेवन बहुत लोकप्रिय था. यह पेट को ठंडा रखने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता था.

8

वहीं बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू का शरबत पीने का रिवाज था. भुने हुए चने से बना सत्तू न केवल प्रोटीन से भरपूर होता है, बल्कि यह शरीर को लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखता है. कड़ी मेहनत करने वाले किसानों और मजदूरों के लिए यह सुबह का सबसे बेहतर आहार माना जाता था.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • जनरल नॉलेज
  • भारतीयों को कैसे लगी चाय की लत, इससे पहले सुबह-सुबह दिन की शुरुआत कैसे करते थे लोग?
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.