✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • इलेक्शन
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा

विधानसभा चुनाव 2026

WEST BENGAL  (148/294)
122-141
TMC
143-165
BJP
4-7
OTH
TAMIL NADU  (118/234)
131-146
DMK+
56-72
AIADMK+
22-26
TVK
7-15
OTH
KERALAM  (71/140)
55-64
LEFT+
74-82
INC+
0-3
BJP
4-8
OTH
PUDUCHERRY  (17/33)
17-23
BJP+
06-08
INC+
03-07
OTH
ASSAM  (64/126)
87-99
BJP+
21-32
INC+
4-8
OTH
(Source:  Poll of Polls)

Human Brain Memory: इंसान का दिमाग कितनी मेमोरी स्टोर कर सकता है, क्या है इसकी कैपेसिटी?

स्पर्श गोयल   |  05 Feb 2026 11:30 AM (IST)
Human Brain Memory: इंसान का दिमाग कितनी मेमोरी स्टोर कर सकता है, क्या है इसकी कैपेसिटी?

Human Brain Memory: इंसानी दिमाग की तुलना अक्सर सुपर कंप्यूटर से की जाती है. लेकिन जब भी बात याददाश्त की आती है तो यह हमारी सोच से काफी ज्यादा पावरफुल हो सकता है. वैज्ञानिक लंबे समय से इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दिमाग असल में कितनी जानकारी स्टोर कर सकता है. हालांकि दिमाग हार्ड ड्राइव या फिर क्लाउड स्टोरेज की तरह डेटा को स्टोर नहीं करता लेकिन मॉडर्न न्यूरोसाइंस हमें इसकी थियोरेटिकल मेमोरी कैपेसिटी का एक दिलचस्प अंदाजा देता है. आइए जानते हैं कि असल में हमारा दिमाग कितनी मेमोरी को स्टोर कर सकता है और इसकी कैपेसिटी क्या है.

1

वैज्ञानिक अनुमानों के मुताबिक एक स्वस्थ वयस्क इंसान का दिमाग लगभग 2.5 पेटाबाइट जानकारी को स्टोर कर सकता है. यह लगभग 2.5 मिलियन गीगाबाइट के बराबर होता है. यह दिमाग को सबसे पावरफुल स्टोरेज सिस्टम में से एक बनाता है.

Continues below advertisement
2

इतनी कैपेसिटी वाला दिमाग लगभग 3 मिलियन घंटे का टीवी कंटेंट स्टोर कर सकता है. यानी कि अगर आप बिना रुके टेलीविजन देखें तो इस मेमोरी स्पेस को पूरी तरह से भरने में 300 साल से भी ज्यादा लगेंगे.

Continues below advertisement
3

इंसानी दिमाग में लगभग 86 से 100 अरब न्यूरॉन्स होते हैं. हर न्यूरॉन हजारों दूसरे न्यूरॉन्स से जुड़ सकता है. इससे एक काफी बड़ा नेटवर्क बनता है. यह कनेक्शन जिन्हें सिनेप्स कहा जाता है वहीं यादें असल में स्टोर होती हैं.

4

कंप्यूटर की तरह जो डेटा को फोल्डर और फाइलों में स्टोर करते हैं दिमाग यादों को न्यूरल एक्टिविटी के पैटर्न के रूप में स्टोर करता है. एक सिंगल सिनेप्स में लगभग 4.7 बिट्स जानकारी स्टोर होने का अनुमान लगाया गया है. इसी तरह सब साथ मिलकर खरबों सिनेप्स काफी बड़ी स्टोरेज क्षमता बनाते हैं.

5

भूलने की वजह यह नहीं होती कि दिमाग में जगह खत्म हो गई है. इसके बजाय यादें इस्तेमाल न होने, नई जानकारी से दखल या कमजोर न्यूरल कनेक्शन की वजह से धुंधली हो जाती हैं. दिमाग लगातार खुद को रीऑर्गेनाइज करता रहता है ताकि जरूरी जानकारी को प्राथमिकता दी जा सके.

6

दिमाग की सही सीमा स्टोरेज नहीं बल्कि रिट्रीवाल है. यादों को न्यूरल नेटवर्क को फिर से एक्टिवेट करके याद किया जाता है. यही वजह है की गंध, भावनाएं या फिर जानी पहचानी जगहें अचानक सालों पुरानी यादों को ताजा कर सकती हैं.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • जनरल नॉलेज
  • Human Brain Memory: इंसान का दिमाग कितनी मेमोरी स्टोर कर सकता है, क्या है इसकी कैपेसिटी?
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.