Rocket Fuel: अंतरिक्ष तक पहुंचने में कितना फ्यूल पी जाता है स्पेस क्राफ्ट?

Rocket Fuel: अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में भेजने के लिए काफी ज्यादा ईंधन की जरूरत होती है. इस वजह से रॉकेट अब तक बनी सबसे ज्यादा ईंधन खपत वाली मशीनों में से एक हैं. लेकिन क्या आपने सोचा है कि अंतरिक्ष तक जाने के लिए एक रॉकेट को कितने ईंधन की जरूरत होती है? आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
आधुनिक रॉकेट अपने कुल वजन का लगभग 85% से 90% प्रोपेलेंट के साथ उड़ान भरते हैं. जब तक वह अंतरिक्ष या फिर ऑर्बिट तक पहुंचते हैं तब तक यह सारा ईंधन लगभग जल जाता है.
SpaceX के फाल्कन 9 का लॉन्च के समय वजन लगभग 5,49,000 किलोग्राम होता है. साथ ही इसमें लगभग 4,10,000 किलोग्राम ईंधन होता है. उड़ान के दौरान यह हर सेकंड लगभग 2500 किलोग्राम प्रोपेलेंट की खपत करता है.
नासा के सैटर्न वी जिसे अपोलो मून मिशन के लिए बनाया गया था, ने लगभग 2.7 मिलियन किलोग्राम ईंधन का इस्तेमाल किया. साथ ही लिफ्ट ऑफ के दौरान लगभग 15000 किलोग्राम प्रति सेकंड की दर से इंधन जलाया.
SpaceX का स्टारशिप लगभग 4.5 मिलियन किलोग्राम ईंधन ले जाता है और हर सेकंड लगभग 40,000 किलोग्राम ईंधन की खपत करता है. इससे यह अब तक विकसित सबसे शक्तिशाली रॉकेट में से एक बन चुका है.
रॉकेट भारी मात्रा में ईंधन की खपत करते हैं क्योंकि उन्हें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को पार करना होता है. उन्हें पहले से मौजूद ईंधन को ऊपर उठाने के लिए भी काफी ज्यादा ईंधन की जरूरत होती है. इस कांसेप्ट को सियोलकोव्स्की रॉकेट इक्वेशन द्वारा समझाया गया है.
इतनी बड़ी मात्रा में प्रोपेलेंट ले जाने के बावजूद असल पे लोड जिसमें सैटेलाइट या फिर अंतरिक्ष यान शामिल होता है आमतौर पर रॉकेट के कुल लॉन्च वजन का सिर्फ एक प्रतिशत से चार प्रतिशत ही होता है.
मिशन की जरूरत और इंजन के डिजाइन के आधार पर रॉकेट इंजन में आमतौर पर RP 1 केरोसिन के साथ लिक्विड ऑक्सीजन, लिक्विड हाइड्रोजन के साथ लिक्विड ऑक्सीजन, या फिर लिक्विड मीथेन के साथ लिक्विड ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया जाता है.
लॉन्च के बाद शुरुआती कुछ मिनट में सबसे ज्यादा ईंधन की खपत होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय रॉकेट को घने वायुमंडलीय दबाव का सामना करना पड़ता है और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव से बाहर निकालने के लिए काफी ज्यादा थ्रस्ट की जरूरत होती है.