अमेरिका में सत्यनारायण की कथा से कितना कमाते हैं पंडित जी? देखें एक दिन का हिसाब-किताब

आजकल सोशल मीडिया पर अलग-अलग नौकरियों और उनकी मिलने वाली सैलरी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चलती रहती हैं. इसी बीच इन दिनों इंटरनेट पर सात समंदर पार यानी अमेरिका में रहने वाले पंडितों की कमाई का मुद्दा खूब सुर्खियां बटोर रहा है. भारत में जहां छोटे-मोटे मंत्र जाप से लेकर कई घंटों तक चलने वाले बड़े धार्मिक अनुष्ठानों की दक्षिणा काफी सामान्य होती है, वहीं अमेरिका में रहने वाले पंडितों की एक दिन की कमाई सुनकर हर कोई हैरान है. वहां रहने वाले हिंदू परिवारों की बढ़ती संख्या के कारण भारतीय रीति-रिवाजों का चलन भी वहां काफी तेजी से बढ़ गया है.
अगर बात अमेरिका में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की करें, तो वहां के नियम और दक्षिणा का हिसाब बिल्कुल अलग है. मिसाल के तौर पर, अगर अमेरिका में रहने वाला कोई भारतीय परिवार अपने घर पर एक छोटी सी सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन भी करवाता है, तो इसके लिए पंडित जी को मोटी रकम चुकानी पड़ती है.
सिर्फ परिवार के लोगों की मौजूदगी में होने वाली इस बेहद साधारण पूजा के लिए पंडित जी आराम से 300 से 350 डॉलर तक चार्ज कर लेते हैं, जो भारतीय मुद्रा के हिसाब से करीब 22 से 25 हजार रुपये बैठती है.
घर के अलावा अगर कोई परिवार यही सत्यनारायण की कथा या अन्य कोई अनुष्ठान किसी मंदिर परिसर में आयोजित करवाना चाहता है, तो उसका गणित और बढ़ जाता है. मंदिर में पूजा संपन्न कराने की स्थिति में श्रद्धालुओं को मंदिर प्रशासन की तय फीस के रूप में लगभग 100 से 150 डॉलर अलग से चुकाने पड़ते हैं.
सबसे बड़ी बात यह है कि यदि यजमान खुद पूजा की सामग्री का इंतजाम नहीं कर पाता है, तो पंडित जी सारी आवश्यक सामग्री खुद लेकर आते हैं और उसके लिए सामग्री का पूरा शुल्क दक्षिणा के अलावा अलग से लिया जाता है.
अमेरिका में सिर्फ बड़े त्योहारों या गृह प्रवेश पर ही नहीं, बल्कि नई गाड़ी खरीदने पर भी लोग बड़े चाव से पूजा-पाठ करवाते हैं. जब भी कोई भारतीय वहां नई कार खरीदता है और उसकी पूजा करवाने के लिए मंदिर पहुंचता है, तो पंडित जी इसके लिए भी अच्छी-खासी दक्षिणा लेते हैं.
इसके साथ ही देश में जब गृह प्रवेश, धनतेरस, दीपावली या फिर सावन का पवित्र महीना आता है, तो अमेरिका की धरती पर भी भारतीय पंडितों की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. इन खास मौकों और त्योहारों के सीजन में पंडित जी की फीस और ज्यादा हो जाती है.
यह बात बहुत ही कम लोग जानते हैं कि कोई भी पंडित सीधे अमेरिका जाकर पूजा-पाठ का काम शुरू नहीं कर सकता है. इसके लिए बकायदा कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है और उन्हें R-1 वीजा की जरूरत पड़ती है.
यह वीजा धार्मिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को ही जारी किया जाता है. इस वीजा को हासिल करने के लिए पंडितों को शास्त्रों और कर्मकांड की काफी गहरी पढ़ाई करनी होती है. इसके साथ ही अमेरिका जाने से पहले उन्हें कुछ जरूरी टेस्ट भी पास करने होते हैं, जिसके बाद ही उन्हें वहां जाने की अनुमति मिलती है.
अगर हम अमेरिका में होने वाली इस कमाई की तुलना भारत में होने वाले पूजा-पाठ से करें, तो दोनों में जमीन-आसमान का अंतर साफ नजर आता है. भारत के ग्रामीण या शहरी इलाकों में छोटे मंत्र जाप, साधारण कथा या सामान्य हवन के लिए अमूमन 500 से 2000 रुपये तक की दक्षिणा दी जाती है.