Bhuja Origin: कितनी तरह का होता है भूजा, कैसे हुई थी इसे बनाने की शुरुआत?
चना भूजा बिहार और आसपास के क्षेत्र में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. यह भुने हुए छोलों से बना होता है और इसमें कटे हुए प्याज, हरी मिर्च, नमक और मसाले मिलाए जाते हैं. यह अक्सर रेहड़ी पटरी वालों द्वारा बेचा जाता है.
बंगाल में झाल मुरी और महाराष्ट्र में भेलपुरी के नाम से मशहूर यह भूजा मुरमुरे, भुनी हुई मूंगफली, प्याज, हरा धनिया और तीखी चटनी से बनाया जाता है. यह झटपट बनकर तैयार हो जाता है और काफी हल्का होने के साथ-साथ स्वादिष्ट भी है.
चूड़ा भूजा बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में काफी ज्यादा मशहूर है. इसे पोहे को सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलकर बनाया जाता है. फिर इसमें नमक, हल्दी और मिर्च पाउडर मिलाया जाता है.
सींग भूजा भुनी फिर तली हुई मूंगफली से बनाया जाता है, जिसे नमक और मसाले के साथ पकाया जाता है. इसी के साथ मक्के या कॉर्नफ्लेक्स से बना मकई भूजा भी काफी ज्यादा मशहूर है.
भेलपुरी भूजा में सभी चीजों को मिला दिया जाता है. इसमें मुरमुरे, सेव, मूंगफली, तली हुई दाल, मसाले सब कुछ मिला होता है. इसी के साथ एक बीकानेरी भुजिया भी होती है जिसकी उत्पत्ति राजस्थान के बीकानेर में हुई थी.
अलग-अलग किस्सों के मुताबिक सबसे प्रसिद्ध भुजिया की शुरुआत 1877 में राजस्थान के बीकानेर में महाराज डूंगर सिंह के शासनकाल के दौरान हुई थी. इस व्यंजन के अलग-अलग प्रकारों को देखते हुए ऐसा कह सकते हैं कि इसकी शुरुआत किसी एक जगह से नहीं हुई.