कार की स्पीड किलोमीटर में, तो जहाज की क्यों नहीं, आखिर समुद्र में कैसे नापी जाती है रफ्तार?
सड़क पर दूरी सीधी और तय होती है, इसलिए किलोमीटर प्रति घंटा सबसे आसान पैमाना है. लेकिन समुद्र में न तो सड़कें होती हैं और न ही सीमाएं साफ दिखती हैं. यहां जहाजों को दिशा और दूरी दोनों का ध्यान रखना पड़ता है.
इसी जरूरत ने समुद्र के लिए अलग माप प्रणाली को जन्म दिया, जिसे आज हम नॉट और नॉटिकल माइल के नाम से जानते हैं. नॉट शब्द की कहानी सैकड़ों साल पुरानी है. पुराने जमाने में जब आधुनिक मशीनें नहीं थीं, तब नाविक जहाज की स्पीड नापने के लिए एक खास तरीका अपनाते थे.
वे एक रस्सी में बराबर दूरी पर गांठें बांधते थे. इस रस्सी को जहाज के पीछे पानी में छोड़ा जाता था और तय समय में जितनी गांठें निकलतीं, उसी से जहाज की रफ्तार मापी जाती थी. गांठ यानी Knot से ही इस गति माप का नाम पड़ा.
नॉटिकल माइल आम किलोमीटर या जमीन वाली माइल से अलग होती है. यह धरती के अक्षांश यानी लैटीट्यूड पर आधारित होती है. धरती के एक अक्षांश के एक मिनट के बराबर दूरी को एक नॉटिकल माइल माना जाता है.
यही वजह है कि समुद्री नक्शों पर दूरी और दिशा को समझने में नॉटिकल माइल ज्यादा सटीक साबित होती है. तकनीकी रूप से 1 नॉट का मतलब है 1 नॉटिकल माइल प्रति घंटा. इसे अगर सड़क की भाषा में समझें, तो 1 नॉट करीब 1.85 किलोमीटर प्रति घंटा के बराबर होता है.
यानी अगर कोई जहाज 20 नॉट की रफ्तार से चल रहा है, तो उसकी स्पीड लगभग 37 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. आज के दौर में जहाजों में GPS, डिजिटल मैप और एडवांस नेविगेशन सिस्टम लगे होते हैं. फिर भी समुद्र में रफ्तार नॉट में ही नापी जाती है.
वजह यह है कि पूरी समुद्री नेविगेशन प्रणाली नॉट और नॉटिकल माइल पर आधारित है. इससे दिशा, दूरी और समय का हिसाब ज्यादा आसान और एक जैसा रहता है, चाहे जहाज किसी भी देश का हो.