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पहले दो बार में नींद पूरी करता था इंसान, कैसे शुरू हुआ 8 घंटे की स्लीप साइकिल का ट्रेंड?

कविता गाडरी   |  23 May 2026 06:39 PM (IST)
पहले दो बार में नींद पूरी करता था इंसान, कैसे शुरू हुआ 8 घंटे की स्लीप साइकिल का ट्रेंड?

History Of 8 Hour Sleep: आज के समय में 7 से 8 घंटे की लगातार नींद को हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा माना जाता है. डॉक्टर और एक्सपर्ट्स भी बेहतर सेहत के लिए लगातार और पूरी नींद लेने की सलाह देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंसान हमेशा से एक बार में 8 घंटे नहीं सोता था. इतिहास और नई रिसर्व बताती है कि सदियों पहले लोग रात में दो हिस्सों में नींद पूरी करते थे. इसे फर्स्ट स्लीप और सेकेंड स्लीप कहा जाता था.

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वैज्ञानिकों के अनुसार, रात में बीच में उठा जाना कोई नई या असामान्य बात नहीं है. इंसानों की पुरानी स्लीप साइकिल ही कुछ ऐसी थी, जिसमें लोग कुछ घंटे सोने के बाद रात में जागते थे और फिर दोबारा सो जाते थे. यही वजह है कि आज भी कई लोगों की नींद रात 2 या 3 बजे के आसपास खुल जाती है.

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रिसर्च के अनुसार, आज से करीब 400 से 500 साल पहले तक दुनिया के कई हिस्सों में लोग दो चरणों में सोते थे. उस समय लोग शाम ढलते ही खाना खाकर जल्दी सो जाते थे. इसे फर्स्ट स्लीप कहा जाता था. करीब 3 से 4 घंटे की नींद के बाद लोग आधी रात में उठ जाते थे.

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इस दौरान कुछ लोग प्रार्थना करते थे, कुछ किताबें पढ़ते थे, तो कुछ घर के छोटे-मोटे काम निपटाते थे. कई लोग इस समय परिवार या पड़ोसियों से बातचीत भी करते थे. इसके बाद लोग दोबारा सो जाते थे और सुबह सूरज निकलने तक अपनी सेकंड स्लीप पूरी करते थे.

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इतिहासकारों के अनुसार, यूरोप, अफ्रीका, एशिया और दुनिया के कई हिस्सों में यह तरीका आम था. प्राचीन ग्रीक और रोमन साहित्य में भी पहले नींद खत्म होने के बाद जागने का जिक्र मिलता है.

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एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस पैटर्न को बदलने में सबसे बड़ी भूमिका आर्टिफिशियल लाइट ने निभाई. 18वीं और 19वीं सदी में पहले तेल के दिए फिर, गैस लैंप और बाद में बिजली आने के बाद लोगों की दिनचर्या बदलने लगी. लोग देर रात तक जागने लगे और काम का समय भी बढ़ गया.

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इसके बाद इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन ने पूरी जीवन शैली बदल दी. तय फैक्ट्री सिस्टम और काम के घंटों ने लोगों को एक तय समय पर सोने और उठने की आदत डाल दी. धीरे-धीरे लगातार 7 से 8 घंटे की नींद को सामान्य माने जाने लगा और दो हिस्सों वाली नींद खत्म होती चली गई.

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नई स्टडीज बताती है कि इंसान का शरीर आज भी इस पुरानी आदत को पूरी तरह नहीं भूला है. वैज्ञानिक का कहना है कि अगर लोगों को लंबे समय तक अंधेरे माहौल में रखा जाए और आर्टिफिशियल लाइट या घड़ी जैसी चीजें हटा दी जाए तो कई लोग फिर से दो हिस्सों में सोने लगते हैं.

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ऑक्सफोर्ड और दूसरी यूनिवर्सिटीज की रिसर्च में भी सामने आया है कि इंसानों की बॉडी क्लॉक रात के बीच में थोड़ी देर जागने को पूरी तरह सामान्य मानती. यही वजह है कि कई लोग रात में अचानक जाग जाते हैं और फिर सोचने लगते हैं कि कोई उन्हें कोई समस्या है.

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