Fish Sleep: समुद्र में तैरते हुए कैसे सोती है मछली? जानें उनके सोने का अनोखा तरीका
इंसानों के उलट मछलियां गहरी बेहोशी वाली नींद नहीं सोतीं. इसके बजाय वे एक ऐसी स्थिति में चली जाती हैं जिसे अक्सर एक्टिव रेस्टिंग कहा जाता है. इस दौरान उनका मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, शरीर की हरकतें कम हो जाती हैं और प्रतिक्रिया भी कम हो जाती है. लेकिन वह आंशिक रूप से सतर्क रहती हैं.
शार्क और टूना जैसी कुछ प्रजातियां आराम करते समय भी तैरना बंद नहीं कर सकती. उनके शरीर को ऑक्सीजन लेने के लिए गलफड़ों पर लगातार पानी के बहाव की जरूरत होती है. यह मछलियां धीरे-धीरे और लगातार तैरते हुए सोती हैं.
जिन मछलियों को लगातार तैरने की जरूरत नहीं होती वह आमतौर पर आराम करने से पहले सुरक्षित ठिकाने को ढूंढ लेती हैं. कुछ मछलियां तो खुद को कोरल रीफ या फिर समुद्री गुफाओं में फंसा लेती हैं.
सोने की सबसे दिलचस्प तकनीक में से एक पैरटफिश की है. सोने से पहले यह एक चिपचिपा पदार्थ निकलती है जो उसके शरीर के चारों तरफ पारदर्शी बुलबुला बनता है. यह चिपचिपा मास्क मछली की गंध को छुपा देता है जिससे शिकारी के लिए उन्हें ढूंढना मुश्किल हो जाता है.
कुछ मछली प्रजातियां सीधी स्थिति में सोती हैं. अपने सिर को ऊपर या नीचे करके एक ही जगह पर तैरती रहती है. वे बिना हिले-डुले रहती हैं.
ज्यादातर मछलियों की पलकें नहीं होती इस वजह से वे आंख खोल कर सोती हैं. उनके दिमाग के जरूरी हिस्सों में एक्टिविटी कम हो जाती है जबकि सेंसरी जागरूकता थोड़ी एक्टिव रहती है.