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House Construction: भारत से कितना अलग है चीन में घर बनाना, यहां क्यों नहीं बन सकता कोई जमीन का मालिक?

स्पर्श गोयल   |  08 Jun 2026 02:18 PM (IST)
House Construction: भारत से कितना अलग है चीन में घर बनाना, यहां क्यों नहीं बन सकता कोई जमीन का मालिक?

House Construction: काफी भारतीयों के लिए जमीन खरीदने का मतलब है उसका हमेशा के लिए मालिक बनना और उसे पीढ़ियों तक आगे बढ़ना. लेकिन चीन में यह सिस्टम काफी अलग है. वहां लोग जमीन के फ्री होल्ड मालिक नहीं बन सकते क्योंकि सारी जमीन पर सरकार या फिर सामूहिक संगठनों का कंट्रोल होता है. आइए जानते हैं कि वहां किस मॉडल पर काम किया जाता है.

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भारत में नागरिक जमीन खरीद सकते हैं और पूरे प्रॉपर्टी अधिकारों के साथ उसके कानूनी मालिक बन सकते हैं. हालांकि चीन में शहरी जमीन सरकार की होती है और ग्रामीण जमीन पर सरकारी देखरेख में सामूहिक संगठनों का कंट्रोल होता है. यही वजह है कि लोग जमीन की असली ओनरशिप के बजाय सिर्फ जमीन इस्तेमाल करने का अधिकार पा सकते हैं.

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जब चीनी नागरिक घर या फिर अपार्टमेंट खरीदते हैं तो उन्हें एक तय समय के लिए जमीन इस्तेमाल करने का अधिकार मिलता है. रिहायशी प्रॉपर्टी के साथ आमतौर पर 70 साल तक की लीज की अवधि मिलती है. इसका मतलब है कि घर के मालिक बिल्डिंग या फिर अपार्टमेंट यूनिट के तो मालिक होते हैं लेकिन उसके नीचे की जमीन के नहीं.

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भारत के उलट जहां कमर्शियल और इंडस्ट्रियल जमीन अक्सर पूरी तरह खरीदी जा सकती है चीन तय समय की लीज देता है. इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स को आमतौर पर 50 साल तक जमीन इस्तेमाल करने का अधिकार मिलता है, इसी के साथ कमर्शियल डेवलपमेंट के लिए लगभग 40 साल की लीज मिलती है. लीज की अवधि खत्म होने के बाद रिन्यूअल के नियम लागू होते हैं.

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भारत में प्रॉपर्टी के मालिक कानूनी तौर पर जमीन और बिल्डिंग दोनों अपने वारिसों को ट्रांसफर कर सकते हैं. चीन में परिवार घर या फिर अपार्टमेंट और बची हुई लीज की अवधि तो आगे बढ़ा सकते हैं लेकिन वे जमीन की ओनरशिप ट्रांसफर नहीं कर सकते.

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भारत में लोग प्लॉट खरीद सकते हैं और मंजूर किए गए प्लान और अपनी पसंद के हिसाब से घर बना सकते हैं. चीन में ज्यादातर शहरी लोग बड़ी कंपनियों या फिर सरकार के सपोर्ट वाले प्रोजेक्ट द्वारा बनाए गए अपार्टमेंट परिसर में रहते हैं.

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70 साल की लीज खत्म होने के बाद उसे रिन्यू कर सकते हैं. रिन्यूअल के लिए अधिकारियों की तरफ से फीस, टैक्स या फिर दूसरी शर्तें लगाई जा सकती हैं.

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