Space Time: पृथ्वी से कितनी अलग होती है स्पेस की घड़ी, जब यहां 12 बजते हैं तो वहां क्या टाइम होता है?

Space Time: क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष में समय पृथ्वी की तुलना में अलग तरह से चलता है? लेकिन उस तरह नहीं जैसा ज्यादातर लोग कल्पना करते हैं. अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर सवार अंतरिक्ष यात्री अपने दैनिक कार्यक्रम के लिए एक मानक पृथ्वी आधारित समय क्षेत्र का पालन करते हैं. भले ही अंतरिक्ष में घड़ियां रफ्तार और गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव की वजह से थोड़ी अलग दर पर टिकती हैं. आइए जानते हैं कि जब धरती पर दोपहर के 12:00 बज रहे होते हैं तो अंतरिक्ष में क्या समय होगा.
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अंतरिक्ष यात्री अलग से अंतरिक्ष समय का इस्तेमाल नहीं करते. वे कोऑर्डिनेटर यूनिवर्सल टाइम का पालन करते हैं. इसे ग्रीनविच मीन टाइम भी कहा जाता है. क्योंकि भारतीय मानक समय यूटीसी से 5 घंटे और 30 मिनट आगे है, भारत में दोपहर के 12:00 दिखाने वाली घड़ी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर सुबह 6:30 बजे के अनुरूप है.
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन काफी ज्यादा तेज रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा करता है और लगभग हर 90 मिनट में एक कक्षा पूरी करता है. अंतरिक्ष यात्री हर 24 घंटे में लगभग 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देखते हैं. इन तीव्र दिन रात चक्रों की वजह से होने वाले भ्रम से बचने के लिए अंतरिक्ष एजेंसियां यूटीसी को आधिकारिक समय मानक के रूप में इस्तेमाल करती हैं.
अल्बर्ट आइंस्टीन के रिलेटिविटी ऑफ थ्योरी के मुताबिक पूरे ब्रह्मांड में समय एक ही रफ्तार से नहीं बहता. रफ्तार और गुरुत्वाकर्षण जैसे कारक यह बदल सकते हैं की घड़ी कितनी तेज या फिर धीमी चलती है.
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी के चारों तरफ लगभग 27600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा करता है. आइंस्टीन की थ्योरी के मुताबिक कोई वस्तु जितनी तेजी से चलती है एक स्थिर पर्यवेक्षक के सापेक्ष में उसका समय उतना ही धीमा गुजरता है. इसका मतलब यह है कि स्टेशन की घड़ियां पृथ्वी पर मौजूद घड़ियों की तुलना में समय का एक छोटा हिस्सा खो देती हैं.
गुरुत्वाकर्षण समय के प्रवाह को प्रभावित करता है. क्योंकि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर संचालित होता है. इस वजह से यह ग्रह की सतह की तुलना में कमजोर गुरुत्वाकर्षण का अनुभव करता है. कमजोर गुरुत्वाकर्षण की वजह से समय थोड़ा तेजी से चलता है.
जब रफ्तार और गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव एक साथ मिलते हैं तो रफ्तार का प्रभाव काफी ज्यादा मजबूत होता है. यही वजह है कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर एक घड़ी पृथ्वी पर एक घड़ी की तुलना में प्रतिदिन लगभग 28 माइक्रोसेकंड धीमे चलती है.