Tea Biscuit History: दुनिया में कैसे शुरू हुआ चाय के साथ ब्रेड-बिस्कुट का रिवाज, जानें भारत को कैसे लगी इसकी आदत?

Tea Biscuit History: दशकों से हम सभी चाय में बिस्किट डुबोकर खाते आए हैं. लेकिन इसकी शुरुआत की कहानी काफी ज्यादा दिलचस्प है. ब्रिटिश कुलीन परिवारों के ड्राइंग रूम से लेकर भारत के भीड़भाड़ वाले रेलवे प्लेटफार्म तक चाय के साथ ब्रेड और बिस्किट का मेल सिर्फ एक संयोग नहीं था. आइए जानते हैं कि भारत को यह आदत कैसे लगी.
यह परंपरा 19वीं सदी में ब्रिटेन में शुरू हुई थी. बेडफोर्ड की डचेस अन्ना ने भोजन के बीच में भूख मिटाने के लिए चाय के साथ शाम के हल्के नाश्ते की शुरुआत की थी. जल्द ही यह आदत ब्रिटिश लोगों के बीच में फैल गई थी.
ब्रिटेन में शुरुआती बिस्किट काफी ज्यादा सख्त होते थे. बिना भिगोए उन्हें खाना काफी ज्यादा मुश्किल था. इसी से चाय में बिस्किट डुबोने की आज की आदत का जन्म हुआ.
आइकॉनिक मैरी बिस्किट का निर्माण सबसे पहले 1874 में पिक फ्रीन्स ने एक शाही विवाह के उपलक्ष में किया था. इसके हलके स्वाद और लंबे समय तक खराब ना होने की क्षमता ने इसे पीढ़ियों से चाय का एक बेजोड़ साथी बना दिया.
इंडियन टी एसोसिएशन ने रेलवे स्टेशन और कार्यस्थलों पर मुफ्त नमूने बांटकर भारत में चाय की खपत को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया. उन्होंने सिर्फ चाय बेची ही नहीं बल्कि लोगों को इसे पीने का तरीका भी सिखाया.
ब्रिटिशों ने उत्पादकता को बनाए रखने के लिए ऑफिस और फैक्ट्री में व्यवस्थित चाय ब्रेक शुरू किया. बिस्किट एक काफी आदर्श नाश्ता बन गया.
शुरुआत में शुद्धता संबंधी चिंताओं की वजह से विरोध का सामना करने वाले बिस्किट को तब स्वीकृति मिली जब पैकेट बंद, मशीन से बने बिस्किट बाजार में आए. पार्ले जैसी भारतीय कंपनियों ने बाद में इन्हें किफायती बनाया.