क्या समंदर में कहीं भी चल सकते हैं जहाज, आखिर सुरक्षित शिपिंग के लिए कितना गहरा होना चाहिए पानी?

निधि पाल   |  19 Apr 2026 05:06 PM (IST)
क्या समंदर में कहीं भी चल सकते हैं जहाज, आखिर सुरक्षित शिपिंग के लिए कितना गहरा होना चाहिए पानी?

समंदर की अनंत गहराई को देखकर अक्सर लगता है कि जहाज कहीं भी बेरोकटोक चल सकते हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है. शिपिंग का पूरा गणित पानी की गहराई और जहाज के वजन पर टिका होता है. क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों टन वजनी जहाज समुद्र तल से टकराए बिना कैसे गुजर जाते हैं? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि 'ड्राफ्ट' और 'अंडर कील क्लीयरेंस' जैसे तकनीकी विज्ञान का हाथ है, जो समुद्री सुरक्षा की आधारशिला हैं. चलिए जानें.

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समुद्र की गहराई तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक 'ड्राफ्ट' है. सरल भाषा में कहें तो जहाज का वह हिस्सा जो पानी के नीचे डूबा रहता है, उसे ही ड्राफ्ट कहते हैं. जहाज जितना बड़ा और भारी होगा, उसका ड्राफ्ट उतना ही ज्यादा होगा.

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सुरक्षा का नियम स्पष्ट है कि समुद्र की गहराई जहाज के ड्राफ्ट से काफी ज्यादा होनी चाहिए. यदि गहराई कम हुई, तो जहाज समुद्र के तल से टकराकर फंस सकता है, जो एक बड़ी समुद्री दुर्घटना को न्योता दे सकता है.

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सुरक्षित शिपिंग के लिए गहराई का एक सामान्य नियम है. यदि किसी जहाज का ड्राफ्ट 8 मीटर है, तो उसके लिए सुरक्षित परिचालन हेतु कम से कम 10 से 12 मीटर गहरा पानी जरूरी है. बड़े कंटेनर जहाजों (10,000 TEU क्षमता से अधिक) के लिए यह गहराई 15 से 16 मीटर तक पहुंच जाती है.

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वहीं, विशालकाय टैंकर (ULCC), जो तेल ले जाने का काम करते हैं, उन्हें चलने के लिए 35 मीटर तक गहरी समुद्री चौड़ाई की जरूरत पड़ती है. यह अंतर जहाज को जमीन से छूने से बचाता है. समुद्री भाषा में 'अंडर कील क्लीयरेंस' (UKC) सुरक्षा का सबसे अहम शब्द है.

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इसका मतलब है कि जहाज के पेंदे (कील) और समुद्र के तल के बीच हमेशा एक निश्चित फासला होना चाहिए. आमतौर पर यह दूरी जहाज के ड्राफ्ट का 10 से 20 प्रतिशत या कम से कम 1 से 2 मीटर होनी चाहिए. यह अतिरिक्त जगह जहाज को लहरों के बीच हिलने-डुलने और अप्रत्याशित बाधाओं से बचने की सुरक्षा प्रदान करती है. बिना उचित UKC के, कोई भी कैप्टन बड़े जहाज को आगे नहीं ले जाता है.

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जहाज जब समुद्र में गति करता है, तो पानी के दबाव के कारण वह स्थिर अवस्था की तुलना में थोड़ा और गहरा डूब जाता है. इसे ही स्क्वाट प्रभाव कहते हैं. गति तेज होने पर यह प्रभाव बढ़ जाता है. इसके अलावा, समुद्र में ज्वार-भाटा की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. बंदरगाहों के पास गहराई की गणना हमेशा 'लो टाइड' यानी कम ज्वार के समय को ध्यान में रखकर की जाती है, ताकि किसी भी स्थिति में जहाज न फंसे.

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समंदर में जहाज कहीं भी नहीं चल सकते हैं. समंदर विशाल जरूर है, लेकिन हर जगह गहराई एक समान नहीं है. समुद्र के बीच में कई छिछले इलाके, समुद्री पहाड़ और चट्टानें होती हैं. जहाजों के लिए समुद्र में विशेष शिपिंग लेन निर्धारित की जाती हैं.

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ये वही मार्ग होते हैं जिन्हें हाइड्रोग्राफिक चार्ट्स के जरिए पूरी तरह से गहरा और बाधा-मुक्त प्रमाणित किया गया होता है. किसी भी बड़े जहाज को इन प्रमाणित रास्तों से बाहर ले जाना जोखिम भरा और नियमों के खिलाफ होता है.

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