✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो

आखिर जमीन के अंदर कैसे बनता है कोयला, जानें कितने तरह का होता है यह काला खजाना

निधि पाल   |  16 Jul 2026 06:45 AM (IST)
आखिर जमीन के अंदर कैसे बनता है कोयला, जानें कितने तरह का होता है यह काला खजाना

दुनियाभर में जब भी ऊर्जा संकट या कच्चे तेल की किल्लत की बात होती है तो पूरी दुनिया का ध्यान एक बार फिर से अपने सबसे भरोसेमंद ईंधन साथी कोयले की तरफ जाता है. हाल ही में मिडिल ईस्ट में चल रहे बवाल के बीच दुनियाभर में तेल और गैस का संकट हो रहा है. इससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई, तब इस काले खजाने की अहमियत और ज्यादा बढ़ जाती है. भारत जैसे विकासशील देश के लिए तो कोयला आज भी उसकी तरक्की का सबसे बड़ा इंजन बना हुआ है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जमीन की गहराइयों में मिलने वाला यह काला खजाना आखिर कैसे बनता है और इसकी गुणवत्ता को कैसे मापा जाता है. आइए जानें.

1

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध और वैश्विक खींचातान के बीच जब भी कच्चे तेज के बाजार में अस्थिरता आती है तो भारत समेत कई देशों में कोयले की मांग अचानक से बढ़ जाती है. कोयला ऊर्जा का एक गैर नवीकरणीय स्रोत है, जिसका मतलब है कि इसे दोबारा से तुरंत नहीं बनाया जा सकता है.

Continues below advertisement
2

भारत अपनी बिजली और औद्योगिक जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा आज भी इसी काले खजाने से पूरा करता है. वैज्ञानिकों ने इसमें मौजूद नमी, हीटिंग वैल्यू और कार्बन के प्रतिशत के आधार पर इसे चार मुख्य श्रेणी में बांटा है, ताकि इसके सटीक इस्तेमाल को समझा जा सके.

Continues below advertisement
3

कोयला एक ज्वलनशील काली या भूरी अवसादी चट्टान है, जो भरपूर मात्रा में कार्बन और हाइड्रोकार्बन से बनी होती है. इसका निर्माण कोई दो-चार दिन में नहीं, बल्कि करोड़ों-अरबों साल के लंबे वक्त में हुआ है.

4

आज से लाखों साल पहले जो घने दलदली जंगल और विशाल पेड़-पौधे धरती के अंदर समा गए थे, उन्होंने अपने अंदर सौर ऊर्जा को समेट रखा था. समय के साथ मिट्टी और भारी चट्टानों की मोटी परतें इन मृत पौधों के ऊपर जमा होती गईं, जिससे ऑक्सीजन की पूरी तरह कमी हो गई.

5

बिना हवा के जमीन के नीचे दबे इन पौधों पर जब ऊपरी परतों का अत्यधिक दबाव और पृथ्वी के आंतरिक हिस्से की तीव्र गर्मी पड़ी, तो धीरे-धीरे एक जादुई बदलाव शुरू हुआ. इस भयानक दबाव और ऊंचे तापमान ने लाखों सालों के सफर में उन सड़ी-गली लकड़ियों और वनस्पतियों को एक ठोस पदार्थ में बदल दिया, जिसे आज हम कोयला कहते हैं.

6

यही कारण है कि कोयले को जीवाश्म ईंधन कहा जाता है. इसमें छिपी हुई ऊर्जा वास्तव में उन प्राचीन पेड़-पौधों की ही रासायनिक ऊर्जा है जो पत्थर का रूप ले चुकी है. जब बात कोयले के वर्गीकरण की आती है, तो एंथ्रेसाइट को इस फेहरिस्त में सबसे पहला और सर्वोत्तम स्थान मिलता है.

7

इस बेहद प्रीमियम क्वालिटी के कोयले में कार्बन की मात्रा 86 प्रतिशत से लेकर 97 प्रतिशत तक पाई जाती है. शुद्धता और उच्च गुणवत्ता के चलते इसकी हीटिंग वैल्यू यानी गर्मी पैदा करने की क्षमता सबसे गहरी होती है.

8

यह जलते वक्त बहुत कम धुआं छोड़ता है. दुर्लभ और अत्यधिक महंगा होने की वजह से इसका इस्तेमाल आमतौर पर बिजली बनाने के बजाय बड़े धातु उद्योगों में किया जाता है. दूसरे नंबर पर बिटुमिनस कोयला होता है, जिसमें कार्बन की मात्रा 45 से 86 फीसदी होती है. इसके बाद आने वाले सब बिटुमिनस कोयले में कार्बन 35 से 45 प्रतिशक होता है और इसकी हीटिंग क्षमता बिटुमिनस से थोड़ी कम आंकी जाती है. कोयले की सबसे अंतिम और चौथी श्रेणी को लिग्नाइट कहा जाता है, जिसमें महज 25 से 35 प्रतिशत तक ही कार्बन मौजूद होता है.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • जनरल नॉलेज
  • आखिर जमीन के अंदर कैसे बनता है कोयला, जानें कितने तरह का होता है यह काला खजाना
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.