कहां से हुई थी जन्मदिन मनाने की शुरुआत, जानें किसने किया था पहला बर्थडे सेलिब्रेशन?

जन्मदिन पर कैंडिल जलाने केक काटने की परंपरा पश्चिमी देशों से आया है. ये परंपरा वर्षों पुरानी है लेकिन क्या आप जानते हैं कि कहां से हुई थी जन्मदिन मनाने की शुरुआत, और किसने किया था पहला बर्थडे सेलिब्रेशन. चलिए हम आपको बताते हैं.
छोटे हों या बड़े आजकल हर कोई अपने जन्मदिन को बेहद खास अंदाज में सेलिब्रेट करना चाहता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये परंपरा कब से शुरू और किसने मनाया था केक काटकर पहला बर्थडे.
बर्थ-डे पर मोमबत्तियां लगाना और उन्हें जलाकर बुझाने का रिवाज प्राचीन ग्रीस यानी यूनान से आया है.
उस समय लोग जलती हुई कैंडल लेकर ग्रीक भागवान के पास जाते थे वहां जाकर उन मोमबत्तियों से ग्रीक भगवान का चिन्ह बनाते थे
इसके बाद ही मोमबत्तियों को बुझा दिया जाता था जिससे उनका धुंआ आसपास फैल सके.
जन्मदिन पर केक काटने और मोमबत्तियां बुझाने की परंपरा की शुरुआत मध्यकालीन जर्मनी से मानी जाती है. 1746 में पहली बार केक पर मोमबत्तियां लगाकर जन्मदिन मनाया गया था.
यह जन्मदिन धार्मिक और सामाजिक सुधारक जिंजोनडॉर्फ का था. उन दिनों जर्मनी में बच्चों के जन्मदिन पर एक खास समारोह होता था.
इस दौरान केक पर मोमबत्तियां जलाकर रखी जाती थीं, जो पूरे दिन जलती रहती थीं और शाम को इच्छा मांगकर बुझाई जाती थीं. माना जाता था कि मोमबत्ती बुझाने की धुंआ ऊपर की ओर जाता है और आपकी इच्छा को भगवान तक पहुंचाता है.