हिमाचल में कुत्ते ने बचाई 67 गांव वालों की जान, क्या जानवरों को पहले से लग जाती है आपदा की भनक?
अब यहां पर समझने वाली बात यह है कि अगर कुत्ता तेजी से न भौंका होता और वहां के लोगों ने इसे चेतावनी समझकर समझदारी भरा कदम न उठाया होता तो आज कई लोग काल के गाल में समा चुके होते.
हालांकि यह कोई नई बात नहीं है कि जानवरों को पहले से ही प्राकृतिक आपदा का आभास होने लगता है. सिर्फ कुत्ते ही नहीं जानवर, मछलियां, पक्षी और कीड़े भी सतर्क हो जाते हैं व अलग तरीके का व्यवहार करने लगते हैं.
किसी भी प्राकृतिक आपदा से पहले कुत्ते अजीब तरीके से भौंकने लगते हैं, पक्षियों की चहचहाहट भी अलग हो जाती है और वे अपना घोंसला छोड़कर इधर-उधर उड़ने लगते हैं.
भूकंप या कोई और आपदा का एहसास पहले सांप और चूहों को होता है, इसके बाद इसका पता कुत्तों को भी चल जाता है. इसीलिए वे भौंकने लगते हैं और उस जगह को छोड़ देते हैं.
जानवर किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा को पहले से इसलिए भांप लेते हैं, क्योंकि वे पृथ्वी से आने वाली तरंगों और हलचलों को पहचानते हैं.
जानवरों में ऐसी इंद्रियां होती हैं, जो कि मनुष्यों से कहीं ज्यादा सक्रिय होती हैं. ऐसे में न सिर्फ सुनना बल्कि वायुमंडल का दबाव और नमी में परिवर्तन को भी वे आसानी से समझ लेते हैं.
भारत के कुड्डालोर तट पर जो सुनामी आई थी, इसमें हजारों की संख्या में लोग मरे थे, लेकिन भैंस, बकरी और कुत्ते सकुशल थे.