बोतल दो...पैसे लो, शराब के शौकीनों को मालामाल करेगी खाली बोतल; जानें कहां शुरू हुआ यह सिस्टम?

देश में तमाम लोग शराब के शौकीन हैं. वे अपने दोस्तों या कलीग्स के पास पार्टी करते हैं और फिर खाली दारू की बोतल को कचरे में फेंक देते हैं. लेकिन अब यह खाली बोतल दोबारा से आपकी जेब गर्म कर सकती है. दक्षिण भारत के एक राज्य में ऐसा सिस्टम शुरू कि गया है, जहां शराब की खाली बोतल को वापस करने पर सीधे कैश रिफंड मिल रहा है. सरकारी शराब की दुकानों पर अब ऐसी आधुनिक मशीन लगाई गई हैं, जो कि आपकी खाली बोतल को स्वीकार करेंगी और बदले में आपको कड़क नोट भी देंगी. चलिए इसके बारे में विस्तार से समझें.
इस अनोखे प्रोजेक्ट की शुरुआत तमिलनाडु के चेन्नई शहर से हुई है. यहां पर एक इलाका है, जिसका नाम है एग्मोर, जहां तमिलनाडु राज्य विपणन निगम द्वारा संचालित एक सरकारी शराब की दुकान पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश की पहली रिवर्स वेंडिंग मशीन लगाई गई है.
इस मशीन की खासियत है कि यह पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पर काम करती है. यह सिस्टम न केवल पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि इसे शराब के शौकीनों को अपनी जेब से लगने वाले अतिरिक्त पैसों का सीधा फंड भी मिल रहा है.
इस हाईटेक योजना को शुरू करने के पीछे एक बहुत बड़ा प्रशासनिक कारण छिपा है. दरअसल तमिलनाडु में लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि शराब की दुकानों पर ग्राहकों से एमआरपी से 10 रुपये ज्यादा वसूले जा रहे थे.
इस गैर-कानूनी ओवरचार्जिंग को रोकने के लिए सरकार ने यह नायाब तरीका निकाला है. अब बोतल खरीदते समय जो अतिरिक्त 10 रुपये लिए जाते हैं, उसे हतोत्साहित करने के लिए यह नियम बनाया गया है कि जैसे ही ग्राहक अपनी खाली बोतल मशीन में वापस करेगा, उसे तुरंत 10 रुपये वापस मिल जाएंगे.
हैदराबाद की एक मशहूर वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी Recykal द्वारा तैयार की गई यह मशीन बेहद आधुनिक कैमरों और एडवांस सेंसर्स से लैस है. जब कोई भी ग्राहक अपनी खाली बोतल को इस रिवर्स वेंडिंग मशीन के अंदर डालता है, तो इसके सेंसर तुरंत एक्टिव हो जाते हैं.
मशीन बोतल पर छपे बारकोड और क्यूआर कोड को स्कैन करती है. इसके साथ ही एआई कैमरे बोतल के आकार, ब्रांड और उसकी मौजूदा स्थिति की गहन जांच करते हैं. जैसे ही मशीन को यह तसल्ली हो जाती है कि बोतल असली है, वह तुरंत 10 रुपये रिफंड कर देती है.
यह मशीन काफी बड़े आकार में है और इसकी भंडारण क्षमता भी जबरदस्त है. यह एक बार में करीब 3000 खाली बोतलों को सुरक्षित रूप से स्टोर करके रख सकती है. इसके काम करने का तरीका भी पूरी तरह से ऑटोमैटिक है.
जब मशीन के अंदर बोतलों की संख्या पूरी हो जाती है तो इसमें लगा हुआ स्मार्ट सिस्टम खुद-ब-खुद संबंधित रीसाइक्लिंग एजेंसी को एक अलर्ट मैसेज भेज देता है. इसके बाद एजेंसी के लोग आकर मशीन को खाली कर देते हैं और बोतलें रीसायकल होने चली जाती हैं.
इस रीसाइक्लिंग मशीन को जमीन पर उतारने की प्रेरणा मद्रास हाईकोर्ट के एक कड़े निर्देश से मिली है. दरअसल तमिलनाडु के खूबसूरत पर्यटन स्थलों जैसे नीलगिरी, कोडाइकनाल और घने जंगलों में पर्यटकों द्वारा फेंकी गई कांच की बोतलों से पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा था.
इन टूटी बोतलों से जंगतों में रहने वाले निर्दोष वन्यजीवों के पैरों में गंभीर चोट लग रही थीं. कोर्ट की फटकार के बाद से तमिलनाडु सरका ने जंगलों, सड़कों और पर्यटन स्थलों को कांच के कचरे से पूरी तरह मुक्त करने के लिए इस रीसाइक्लिंग अभियान का आगाज किया है.