Moon Magnetic Field: क्या धरती की तरह चांद पर भी हैं मैग्नेटिक पोल्स, जानें वहां कैसे काम करेगा कम्पास?

Moon Magnetic Field: धरती पर दिशा को पता करने के लिए कंपास काफी ज्यादा काम आता है. लेकिन क्या हो अगर आप एक कंपास चांद पर ले जाएं? सवाल यह उठता है कि क्या यह कंपास चांद पर भी धरती की तरह ही काम करेगा? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
धरती का एक पिघला हुआ कोर है. यह उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के साथ एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र बनाता है. चांद का कोर समय के साथ ठंडा होकर ठोस हो गया है. यही वजह है कि चांद पर कोई चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न नहीं होता.
हालांकि चांद में पूरे ग्रहों का कोई चुंबकीय तंत्र नहीं है फिर भी इसकी पपड़ी में कुछ चट्टानें मैग्नेटिज्म बनाए रखती हैं. यह अरबों साल पहले के अवशेष हैं जब शायद चांद का भी एक चुंबकीय क्षेत्र रहा होगा. हालांकि ये क्षेत्र बिखरे हुए और कमजोर हैं.
अगर आप चांद पर एक सामान्य कंपास रखेंगे तो उसकी सुई किसी भी स्थिर दिशा में नहीं रुकेगी. किसी भी चुंबकीय खिंचाव के बिना यह या तो बिना किसी लक्ष्य के घूमती रहेगी या फिर अस्थिर रहेगी.
लगातार एक ही दिशा दिखाने के बजाय कंपास की सुई आसपास के चुंबकीय स्रोतों पर प्रतिक्रिया कर सकती है. यह चुंबकीय स्रोत चुंबकीय चट्टान या फिर यहां तक कि किसी अंतरिक्ष यात्री के सूट या उपकरणों में मौजूद धातु की चीज भी हो सकती है.
धरती पर कंपास एक भरोसेमंद नेविगेशन उपकरण है. हालांकि चांद पर यह दिशा बताने के लिए पूरी तरह से बेकार हो जाता है.
क्योंकि कंपास काम नहीं करते इस वजह से अंतरिक्ष यात्री दूसरी तकनीक पर निर्भर रहते हैं. अपोलो कार्यक्रम जैसे मिशनों के दौरान दिशा बनाए रखने के लिए लूनर रोवर्स में जाइरोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता था. अंतरिक्ष यात्रियों ने क्रेटर, टायरों के निशान और सूरज व तारों की स्थिति का इस्तेमाल करके भी नेविगेट किया है.