क्या वाकई एक EV में लग जाती है एक किलो चांदी, जानें किस गाड़ी में सबसे ज्यादा लगती है चांदी?
गाड़ियों में चांदी का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है, क्योंकि चांदी सबसे अच्छे विद्युत कंडक्टरों में से एक है. इसी वजह से इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में चांदी का उपयोग बड़ी मात्रा में किया जा रहा है.
अगर गाड़ियों के सेगमेंट के हिसाब से तुलना करें तो एक पेट्रोल या डीजल से चलने वाली गाड़ी में लगभग 15 से 28 ग्राम चांदी का उपयोग होता है. एक सामान्य हाइब्रिड (HEV) गाड़ी में 18 से 34 ग्राम चांदी इस्तेमाल की जाती है, जबकि एक इलेक्ट्रिक व्हीकल में करीब 25 से 50 ग्राम चांदी का उपयोग होता है.
इस तरह की बैटरी में चांदी की मोटी परत लगाई जाती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़ी इलेक्ट्रिक कारों में लगभग 1 किलो तक चांदी का इस्तेमाल हो सकता है. इलेक्ट्रिक व्हीकल में चांदी का उपयोग इसलिए किया जाता है, क्योंकि चांदी बेहतरीन विद्युत कंडक्टर है और इसमें जंग नहीं लगती. इसी वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी का इस्तेमाल लगभग अनिवार्य माना जाता है.
इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी का उपयोग कई पार्ट्स को बनाने और संचालित करने के लिए किया जाता है. चांदी का इस्तेमाल बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में सेल्स के बीच पावर फ्लो को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है. इसके अलावा ब्रेक सिस्टम, गाड़ी की खिड़कियों के इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, टच स्क्रीन और रडार में भी चांदी का इस्तेमाल होता है.
चांदी का उपयोग सिर्फ गाड़ियों में ही नहीं, बल्कि फास्ट चार्जर और चार्जिंग पॉइंट्स में भी किया जाता है. इससे बिजली का प्रवाह सही बना रहता है और कार को चार्ज करने में कोई दिक्कत नहीं आती है.
चांदी का उपयोग गाड़ियों में हाई-परफॉर्मेंस इलेक्ट्रिकल स्विच में भी किया जाता है, क्योंकि इसमें बिजली के प्रति प्रतिरोध बहुत कम होता है. इससे स्विच ऑन या ऑफ करते समय ऊर्जा का नुकसान नहीं होता है.