Tree Communication: क्या रात को जंगल में लगे पेड़ भी करते हैं आपस में बात? जान लीजिए इसके पीछे का सच

Tree Communication: सूर्यास्त के बाद जंगल शांत दिखाई दे सकता है लेकिन जमीन के नीचे कुछ और ही चल रहा होता है. वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि पेड़ इंसानों की तरह ध्वनि का इस्तेमाल करके बात नहीं करते. इसके बजाय वे भूमिगत फंगल नेटवर्क और हवाई रासायनिक संकेत के जरिए सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
शोध से यह पता चला है कि पेड़ एक बड़े भूमिगत फंगल नेटवर्क से जुड़े हुए हैं जिसे वुड वाइड वेब या फिर माइकोरिजल नेटवर्क कहा जाता है. यह प्रणाली अलग-अलग पेड़ों की जड़ों को जोड़ती है जिससे उन्हें संकेत और संसाधन का आदान-प्रदान करने में मदद मिलती है.
मौखिक भाषा का इस्तेमाल करने के बजाय पेड़ अपनी जड़ के जरिए से इलेक्ट्रिकल इंपल्स और केमिकल संदेश भेजते हैं. यह संकेत पर्यावरणीय परिवर्तनों और आसपास के दूसरे पेड़ों पर प्रतिक्रियाओं के कोऑर्डिनेशन में मदद करते हैं.
जब कीड़े या फिर कीट किसी पेड़ पर हमला करते हैं तो यह हवा में वाष्पशील कार्बनिक कंपाउंड छोड़ता है. आसपास के पेड़ इन रसायन का पता लगाते हैं और उस खतरे से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अपने खुद के रक्षात्मक पदार्थ का उत्पादन शुरू कर देते हैं.
बड़े पेड़ जिन्हें अक्सर मदर ट्री कहा जाता है भूमिगत नेटवर्क के जरिये से छायादार क्षेत्र में उगने वाले युवा पौधों में शुगर और पोषक तत्व ट्रांसफर कर सकते हैं जहां सूरज की रोशनी सीमित है.
भूमिगत नेटवर्क पड़ोसी पेड़ों को बीमार, तनावग्रस्त या फिर जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे पेड़ों के साथ पानी और जरूरी पोषक तत्व साझा करने में भी मदद करता है.
हालांकि रात में फोटोसिंथेसिस बंद हो जाता है, पेड़ अपनी जड़ों के जरिए से सांस लेना और पानी, पोषक तत्व और रासायनिक संकेत का आदान प्रदान करना जारी रखते हैं.