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Human Brain: कितने जीबी का होता है इंसान का दिमाग, सुपर कंप्यूटर तो आस-पास भी नहीं टिकता

स्पर्श गोयल   |  09 Jul 2026 02:04 PM (IST)
Human Brain: कितने जीबी का होता है इंसान का दिमाग, सुपर कंप्यूटर तो आस-पास भी नहीं टिकता

Human Brain: इंसानी दिमाग को अक्सर अब तक का सबसे शक्तिशाली कंप्यूटर कहा जाता है. इसकी क्षमता दुनिया के सबसे तेज सुपर कंप्यूटर से भी कहीं ज्यादा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि कितने जीबी का होता है इंसान का दिमाग.

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वैज्ञानिकों का यह अनुमान है कि इंसानी दिमाग की स्टोरेज क्षमता लगभग 2.5 पेटाबाइट यानी कि 2.5 मिलियन जीबी है. यह लगभग 3 मिलियन घंटे का एचडी वीडियो स्टोर करने के लिए काफी है. यह लगातार 340 साल से ज्यादा समय तक चलने वाले वीडियो के बराबर है.

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दिमाग में लगभग 86 अरब न्यूरॉन्स होते हैं. इसी के साथ हर न्यूरॉन हजारों कनेक्शन बनाता है. इन कनेक्शन को सिनेप्स कहा जाता है. ये नेटवर्क काफी बड़ी मात्रा में जानकारी को स्टोर करने और प्रोसेस करने में जिम्मेदार होते हैं.

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फिक्स्ड स्टोरेज वाले कंप्यूटर के उलट जैसे-जैसे हम सोचते, सीखते और अनुभव प्राप्त करते हैं दिमाग लगातार नए न्यूरल कनेक्शन बनाता रहता है. यह क्षमता इसे समय के साथ अपनी प्रोसेसिंग और मेमोरी क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है.

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इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद भी इंसानी दिमाग सिर्फ 20 वॉट बिजली पर काम करता है. यह लगभग एक छोटे लाइट बल्ब के बराबर है. इसकी तुलना में आधुनिक सुपर कंप्यूटर को मुश्किल कैलकुलेशन करने के लिए मेगावाट बिजली की जरूरत होती है.

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दिमाग मेमोरी, भावना, रचनात्मक, चेतना और अनुकूलन क्षमता को एक साथ मिलाता है और साथ ही सांस लेने, दिल की धड़कन, देखने और सोचने के काम को भी कंट्रोल करता है. दूसरी तरफ सुपर कंप्यूटर सिर्फ इंसानों द्वारा दिए गए डेटा और निर्देशों के आधार पर ही काम कर सकते हैं.

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स्टोरेज भर जाने पर क्रैश होने के बजाय दिमाग समय के साथ कम जरूरी यादों को कमजोर कर देता है और उन पर नई जानकारी लिख देता है. यह अनोखी प्रक्रिया नई और ज्यादा जरूरी जानकारी के लिए जगह बनाने में मदद करती है.

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